
West Bengal शिक्षक भर्ती घोटाला: ED ने विधायक जीबन कृष्ण साहा को किया गिरफ्तार
कोलकाता | 27 अगस्त 2025, पश्चिम बंगाल में चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी, कोलकाता ने 25 अगस्त 2025 को मुर्शिदाबाद जिले के बुरवान निर्वाचन क्षेत्र से विधायक जीबन कृष्ण साहा और उनके करीबी प्रसन्ना कुमार रॉय से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया।

इस दौरान जांच एजेंसी को कई डिजिटल उपकरण, अपराध-संकेती दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात बरामद हुए। तलाशी के बाद ईडी ने जीबन कृष्ण साहा को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत गिरफ्तार कर लिया।
क्या है मामला?
यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के स्कूलों में सहायक शिक्षकों (कक्षा IX-XII) की अवैध नियुक्तियों से जुड़े मामले में हुई है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में पश्चिम बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) के अधिकारियों और कई नेताओं की मिलीभगत सामने आई है।
आरोप है कि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को योग्यता और मेरिट लिस्ट को दरकिनार करते हुए अवैध तरीके से शिक्षक पदों पर नियुक्त किया गया। इसके एवज में भारी रिश्वत की वसूली भी की गई थी।
ईडी की कार्रवाई
- 25 अगस्त को कोलकाता ईडी की टीम ने मुर्शिदाबाद के बुरवान क्षेत्र में कई परिसरों पर छापेमारी की।
- तलाशी में कंप्यूटर, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क जैसे डिजिटल उपकरण, कई संदिग्ध दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात बरामद हुए।
- ईडी ने यह भी दावा किया कि जब्त किए गए दस्तावेज इस पूरे शिक्षक भर्ती घोटाले की परतें खोलने में मदद करेंगे।

विधायक साहा को भेजा गया ईडी हिरासत में
गिरफ्तारी के बाद विधायक जीबन कृष्ण साहा को विशेष न्यायालय, कोलकाता में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 6 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया है ताकि एजेंसी उनसे पूछताछ कर और अधिक जानकारी जुटा सके।
इससे पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाला कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी समेत कई बड़े नेताओं और एसएससी अधिकारियों को ईडी और सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी हैं। यह मामला राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है और विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाता रहा है।

राजनीतिक हलचल
जीबन कृष्ण साहा की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर से भूचाल आ गया है। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार का सबूत बताया है, जबकि सत्तारूढ़ दल ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है।
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