
West Bengal में विशेष गहन (SIR) की प्रक्रिया और चुनाव आयोग का बड़ा Update
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने अंतिम तैयारियां शुरू कर दी हैं। बिहार के बाद अब बंगाल में भी अक्टूबर माह से SIR प्रक्रिया की शुरुआत होने की उम्मीद है। इसके लिए उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती अगले सप्ताह कोलकाता जाकर जिला स्तर पर तैयारियों की समीक्षा करने वाले हैं.

वोटर लिस्ट की जांच और दस्तावेज की स्थिति
इलेक्शन कमीशन ने राज्यों को 2002 की SIR वोटर लिस्ट और 2025 की मौजूदा वोटर लिस्ट का डेटा लिंक करने का निर्देश दिया है। अनुमान है कि 75,000 से 80,000 बूथों पर नियुक्त बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा इस कार्य को दस दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद, वोटर लिस्ट के बदलाव, नई प्रविष्टियों और मृत व्यक्तियों/स्थानांतरण का रिकार्ड सुनिश्चित होगा। आयोग द्वारा यह तय किया गया है कि सभी मतदाताओं का डेटा वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा.
दस्तावेज स्वीकार करने पर विवाद
पश्चिम बंगाल सरकार ने SIR के लिए राज्य द्वारा जारी स्वास्थ्य साथी और राशन (पीडीएस) कार्ड को पहचान पत्र के तौर पर शामिल करने का आग्रह किया था, जिसे चुनाव आयोग ने इस बार खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि आधार कार्ड को मतदाता पहचान पत्र के रूप में मान्य किया जाए.

ममता सरकार और विपक्ष का विरोध
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पार्टी लगातार SIR का विरोध कर रही है। उनका दावा है कि यह प्रक्रिया एनआरसी और सीएए लागू करने का रास्ता साफ कर सकती है। भाजपा का कहना है कि इससे अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को सूची से बाहर किया जाएगा
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