
वक्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 पर Supreme Court के अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अहम अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने वक्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा और बोर्डों की संरचना को लेकर स्पष्ट व्यवस्था दी है।

वक्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा
अगली सुनवाई तक वक्फ़ संपत्तियों से किसी को बेदखल नहीं किया जाएगा।
राजस्व अभिलेख और बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज प्रविष्टियों में कोई बदलाव नहीं होगा।
अगर धारा 3C के तहत जांच शुरू होती है तो धारा 83 के तहत ट्रिब्यूनल के अंतिम निर्णय तक इन संपत्तियों पर किसी भी तीसरे पक्ष का अधिकार नहीं बनाया जा सकेगा।
गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों को लेकर निर्देश
केंद्रीय वक्फ़ परिषद (22 सदस्यीय) में अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं।
राज्य वक्फ़ बोर्ड (11 सदस्यीय) में अधिकतम 3 गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं।
CEO की नियुक्ति
अदालत ने धारा 23 को रोकने से इनकार किया, मगर निर्देश दिया कि संभव हो तो बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मुस्लिम समुदाय से ही नियुक्त किया जाए, क्योंकि CEO ही बोर्ड का विशेष सचिव भी होता है।

पंजीकरण की अनिवार्यता
पंजीकरण से संबंधित प्रावधान को अदालत ने वैध माना। अदालत ने कहा कि यह नया प्रावधान नहीं है, बल्कि 1995 से 2013 तक पहले भी यह शर्त लागू थी।
संसद द्वारा पारित वक्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 के व्यापक प्रावधानों को चुनौती देते हुए याचिकाएँ दाखिल की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कहा था कि सुनवाई लंबित रहने के दौरान केंद्र सरकार गैर-मुसलमानों को बोर्ड या परिषद में नियुक्त नहीं करेगी और किसी भी वक्फ़ संपत्ति को डीनोटिफाई या उसके स्वरूप में बदलाव नहीं होगा।
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