
Vote चोर गद्दी छोड़, Congress की नई चुनावी मुहिम
कांग्रेस ने नई चुनावी मुहिम “वोट चोर, गद्दी छोड़” शुरू की: मतदाताओं की आवाज बुलंद, चुनावी धरातल पर बड़ा संघर्ष
कांग्रेस पार्टी ने बिहार में एक जोरदार चुनावी मुहिम “वोट चोर, गद्दी छोड़” की शुरुआत करी है, जो 15 अक्टूबर 2025 तक चलेगी। यह अभियान पार्टी के लिए राजनीतिक मजबूती बढ़ाने एवं वोटरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पार्टी के मुताबिक, इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में हो रही धांधली और मतदाता अधिकारों का हनन रोकना है।

इस अभियान के तहत कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता, नेता और सामान्य सदस्य हर जिले, ब्लॉक और पंचायत की घर-घर जाकर मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं और उनसे चुनाव में साफ-सुथरे और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग के लिए समर्थन मांग रहे हैं। पार्टी इस अभियान के तहत लगभग 5 करोड़ हस्ताक्षर एकत्रित करने का लक्ष्य रखती है, जिसे बाद में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रकार यह हस्ताक्षर अभियान मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए एक गंभीर सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन बन गया है।
अभियान की पृष्ठभूमि और आज की स्थिति
इस हस्ताक्षर अभियान के पहले ही राहुल गांधी के नेतृत्व में “वोटर अधिकार यात्रा” निकाली गई थी, जिसने व्यापक जनसमर्थन पाया। उस यात्रा के अनुभव को लेकर अब यह कदम उठाया गया है ताकि मतदाता अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
राज्य स्तर पर बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम इस अभियान के मुखिया हैं। उन्होंने कहा है कि यह अभियान केवल चुनावी राजनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का भी संघर्ष है। उन्होंने बताया कि इस पहल से जनता की सचाई सीधे तौर पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, इसके जरिए मतदाता अपने अधिकारों के लिए जागरूक होंगे और चुनाव में हो रही गड़बड़ियों पर रोक लगाई जाएगी।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व
“वोट चोर, गद्दी छोड़” मुहिम कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जो वर्तमान चुनावी माहौल में वोटरों के विश्वास को मजबूत करने और भ्रष्टाचार एवं मतदाता धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश कर रही है। यह अभियान भाजपा सहित अन्य दलों की चुनावी रणनीतियों को चुनौती देने के इरादे से भी जुड़ा हुआ है।
आगे की राह और चुनौतियां
हालांकि इस मुहिम को लेकर राजनीतिक विरोध और आलोचनाएं भी हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी इसे लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक बता रही है। पार्टी ने कहा है कि इस अभियान के दौरान राज्य सरकार और चुनाव आयोग से संवाद भी किया जाएगा, ताकि चुनाव व्यवस्था सुधारने के लिए आवश्यक सुझाव और दबाव बनाया जा सके।
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