
विदेश मंत्रालय की चेतावनी: भारतीयों को रूसी सेना में भर्ती न होने की सलाह, फंसे लोगों की वापसी के लिए बातचीत तेज
यूक्रेन युद्ध के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती न होने की सख्त सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा है कि रूसी सेना में भर्ती होना बेहद खतरनाक हो सकता है और किसी भी लुभावने ऑफर के चक्कर में न पड़ें। हाल ही में आयी रिपोर्ट्स से पता चला है कि यूक्रेन युद्ध में लगभग 15 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं जिन्हें रूस की तरफ से लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले एक साल से भारत सरकार लगातार भारतीयों को रूसी सेना में शामिल होने से बचने की चेतावनी दे रही है। मंत्रालय ने मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से रूसी अधिकारियों से फंसे हुए भारतीयों की तत्काल रिहाई और सुरक्षित वापस लाने की बातचीत भी तेज कर दी है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने इस मामले को रूस के राजदूत के समक्ष भी गंभीरता से उठाया है।
जायसवाल ने यह भी बताया कि जिन भारतीयों के रूस में फंसे होने की पुष्टि हुई है, उनके परिवारों से संपर्क साधा गया है ताकि उनकी सहायता की जा सके।
युद्ध के वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संघर्ष में हजारों सैनिक मारे जा चुके हैं। अनुमानित तौर पर यूक्रेन की ओर से 31,000 से 150,000 सैनिक और रूस की ओर से 36,000 से 200,000 सैनिक हताहत हो चुके हैं। कुल मिलाकर युद्ध में मृत और घायल दोनों की संख्या 5 लाख से 14 लाख के बीच हो सकती है, हालांकि ये आंकड़े पूरी तरह सटीक नहीं हैं।

विदेश मंत्रालय की यह चेतावनी और कूटनीतिक कोशिशें भारत सरकार की सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा के प्रति गंभीरता को दर्शाती हैं।
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