Uttar Pradesh तोड़फोड़ अभियान: अवैध मस्जिद पर कार्रवाई, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया
संभल, उत्तर प्रदेश | जय प्रकाश सिंह | 2 अक्टूबर 2025
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के असमोली थाना क्षेत्र अंतर्गत राज बुझर गांव में आज सुबह से एक बड़ा तोड़फोड़ अभियान चलाया गया। प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने एक मस्जिद के निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की, जिसमें भारी मशीनरी और पुलिस बल की तैनाती की गई। यह कार्रवाई जिला प्रशासन के अतिक्रमण हटाओ अभियान का हिस्सा है, जो पिछले कई महीनों से पूरे जिले में चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, मस्जिद का निर्माण बिना किसी अनुमति के लगभग पांच वर्ष पूर्व शुरू हुआ था, जिसकी शिकायत स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से की जा रही थी।

कार्रवाई की शुरुआत आज तड़के करीब 5 बजे हुई, जब एसडीएम संभल विनय कुमार के नेतृत्व में नगर पालिका की टीम और जेसीबी मशीनें गांव पहुंचीं। मस्जिद के आसपास के पूरे इलाके को पुलिस ने घेराबंदी में ले लिया था। लगभग 200 से अधिक पुलिसकर्मी, जिसमें एसपी संभल अनुराग शर्मा के निर्देश पर मुरादाबाद और बदायूं से अतिरिक्त फोर्स शामिल थी, तैनात की गई। प्रशासन ने रातोंरात नोटिस जारी कर मस्जिद कमेटी को सूचित किया था, लेकिन कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर बुलडोजर एक्शन लेना पड़ा। मस्जिद का मुख्य ढांचा, जिसमें दो मीनारें और प्रार्थना कक्ष शामिल थे, लगभग दो घंटे में जमींदोज हो गया। कार्रवाई के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन स्थानीय लोग दहशत में थे।
“यह कार्रवाई कानून के दायरे में हो रही है। अवैध निर्माण किसी भी धार्मिक स्थल को क्षति पहुंचाने का उद्देश्य नहीं रखता, बल्कि सरकारी संपत्ति की रक्षा करता है। हमने सभी पक्षों को पूर्व सूचना दी थी और शांति बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया है,” एसडीएम विनय कुमार ने बताया। उन्होंने आगे कहा कि राज बुझर गांव में यह पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। पिछले जून में संभल के चंदौसी क्षेत्र में भी इसी तरह की तीन अवैध मस्जिदों को हटाया गया था, जिसके बाद इलाके में सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्य तेज हो गए। जिला प्रशासन का दावा है कि इस अभियान से अब तक 50 से अधिक अवैध निर्माण हटाए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार संभव हो पाया है।

स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। गांव के एक बुजुर्ग निवासी रामस्वरूप सिंह ने कहा, “मस्जिद का निर्माण गांव की मुख्य सड़क पर किया गया था, जिससे यातायात बाधित हो रहा था। प्रशासन का कदम स्वागतयोग्य है, लेकिन हमें उम्मीद है कि इससे सामुदायिक सद्भाव प्रभावित न हो।” वहीं, मस्जिद कमेटी के सदस्य मोहम्मद इकबाल ने निराशा जताते हुए कहा, “हमने कई बार अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रक्रिया लंबी चल रही थी। अब हम अदालत का रुख करेंगे।” गांव में मुस्लिम और हिंदू समुदाय के लोग मिलकर रहते हैं, इसलिए प्रशासन ने कार्रवाई के बाद शांति समितियों की बैठक बुलाई है, जिसमें स्थानीय नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है।
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