
Mahasamund Police की अनूठी पहल, स्कूली बच्चों को सिखाया मोबाइल और नशे से बचने का मंत्र
महासमुंद: भावी पीढ़ी को नशे की लत और डिजिटल खतरों से बचाने के लिए महासमुंद पुलिस द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में आज शनिवार को महासमुंद पुलिस की टीम शिशु संस्कार विद्यालय पहुंची। यहाँ आयोजित विशेष सत्र में लगभग 250 छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों, मोबाइल के दुरुपयोग और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया गया।
नशे के खिलाफ ‘MANAS’ का हथियार
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को बताया कि नशा न केवल स्वास्थ्य को बर्बाद करता है, बल्कि पूरे भविष्य को अंधकार में डाल देता है। पुलिस ने विशेष रूप से भारत सरकार की हेल्पलाइन ‘MANAS’ (1933) के बारे में जानकारी दी। बच्चों से कहा गया कि यदि उनके आसपास कहीं भी नशीले पदार्थों की बिक्री हो रही हो या कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो वे तुरंत टोल फ्री नंबर 1933 पर सूचना दे सकते हैं।

मोबाइल गेम और साइबर फ्रॉड से अलर्ट
आजकल बच्चों में मोबाइल गेमिंग का बढ़ता क्रेज चिंता का विषय है। पुलिस ने बच्चों को मोबाइल के अधिक उपयोग (Screen Time) से होने वाली शारीरिक और मानसिक समस्याओं के बारे में समझाया। साथ ही, गेमिंग के दौरान होने वाले साइबर फ्रॉड के प्रति सचेत करते हुए बताया कि कैसे छोटी सी लापरवाही से निजी जानकारी चोरी हो सकती है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ और अजनबियों से सतर्क रहने की हिदायत दी गई। पुलिस ने बच्चों को समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति से चॉकलेट, खिलौने या उपहार के लालच में कोई भी चीज न लें।
आपातकालीन नंबरों की दी जानकारी
छात्रों को संकट के समय उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण टोल-फ्री नंबरों को याद कराया गया:
- 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन): किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या समस्या होने पर।
- 112 (आपातकालीन सेवा): किसी भी आपात स्थिति में तत्काल पुलिस सहायता के लिए।
- 1933 (MANAS): ड्रग्स और नशा मुक्ति संबंधी शिकायत के लिए।
महासमुंद पुलिस की इस पहल की स्कूल प्रबंधन और पालकों ने सराहना की है। पुलिस का मानना है कि बचपन से ही इन विषयों पर जागरूकता बच्चों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद करेगी।
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