
Trump की 100% फ़ार्मा Tariff नीति — भारत पर क्या असर पड़ेगा?
नई दिल्ली, 26 सितंबर 2025: भारतीय फार्मा उद्योग हाल ही में वैश्विक बाजार में उठ रहे अस्थिर संकेतों को लेकर सतर्क हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल की नीतिगत घोषणाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संभावित बाधाओं के मद्देनजर इंडस्ट्री को अपनी सप्लाई‑चेन, निर्यात रणनीतियों और घरेलू उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

निर्यात और सप्लाई‑चेन पर संभावित असर
भारत का फार्मा सेक्टर विश्व की सबसे बड़ी दवा आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। लेकिन कई कंपनियाँ अब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार और कुछ विदेशी कच्चे माल पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विदेशी नीति में बदलाव या टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय कंपनियों के निर्यात और आय पर असर पड़ सकता है।
साथ ही, कुछ छोटे और मध्यम उत्पादक, जो विदेश से कच्चा माल मंगाते हैं, उन्हें शिपमेंट में देरी और कस्टम्स से संबंधित जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
घरेलू बाजार में तैयारी
भारतीय सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू दवा आपूर्ति सुरक्षित रहे। इसके तहत जरूरी दवाओं की उपलब्धता और कीमत नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इंडस्ट्री को सलाह दी गई है कि वह प्रोडक्ट‑मिक्स, इन्वेंट्री और वित्तीय प्रवाह की समीक्षा तुरंत करे।
दीर्घकालिक रणनीतियाँ
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपने फार्मा उद्योग की स्थायित्व और क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। इसमें प्रमुख बिंदु हैं:
1. API और इंटरमीडिएट्स का स्थानीय उत्पादन: आयात‑निर्भर दवाओं के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना।
2. नए निर्यात बाजारों की तलाश: लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण‑पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में विपणन और बिक्री।
3. CDMO/CMO सेवाओं का विस्तार: भारत को ग्लोबल विनिर्माण हब बनाने के अवसर।

इंडस्ट्री और सरकार की साझा रणनीति
- सरकार और इंडस्ट्री ने मिलकर तुरंत कुछ कदम उठाने का निर्णय लिया है:
- इंडस्ट्री को प्रोडक्ट‑मिक्स और कैश‑फ्लो का आकलन करना।
- नए बाजारों और निर्यात‑डाइवर्सिफिकेशन की योजना बनाना।
- छोटे और मध्यम उत्पादकों के लिए वित्तीय और नीतिगत सहायता बढ़ाना।
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