
Raipur: सामुदायिक भवनों पर पूर्व महापौर का कब्जा, सरकारी पैसे का निजी उपयोग
रायपुर (जसेरि)। राजधानी रायपुर के तीन सामुदायिक भवनों पर पूर्व महापौर एजाज ढेबर और उनके सहयोगियों का कब्जा होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ये भवन नगर निगम की जमीन पर निगम द्वारा ही निर्मित किए गए हैं, लेकिन इनका संचालन और आय निजी हाथों में चली गई है। यह मामला सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

तीन सामुदायिक भवनों पर कब्जा
बैरन बाजार उत्कल सामुदायिक भवन (विद्यानगर), छोटा मुस्लिम हॉल (मोतीबाग) और नगर निगम मुख्यालय के पीछे स्थित कुतुबी सामुदायिक हॉल पर एजाज ढेबर का कब्जा बताया जा रहा है। इन भवनों का किराया और अन्य शुल्क सीधे उनके द्वारा वसूला जा रहा है। आरोप है कि इन भवनों में सुविधाओं के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं है। उदाहरण के तौर पर, इन हॉल्स में एयर कंडीशनर (एसी) तो लगाए गए हैं, लेकिन उद्घाटन के एक सप्ताह बाद से ही ये खराब पड़े हैं और इन्हें ठीक करने की कोई कोशिश नहीं की गई। इसके बावजूद, मनमाने तरीके से भारी-भरकम शुल्क वसूला जा रहा है।
सरकारी संपत्ति का निजी उपयोग
सामुदायिक भवनों का निजी उपयोग गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से प्रशासन इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। सूत्रों के मुताबिक, इन भवनों से होने वाली आय का हिसाब-किताब भी पारदर्शी नहीं है। कांग्रेस सरकार के बाद अब प्रदेश और नगर निगम में भाजपा की सरकार है, लेकिन इसके बावजूद इन भवनों का संचालन एजाज ढेबर के हाथों में कैसे और क्यों है, यह जांच का विषय बना हुआ है।
प्रशासनिक लापरवाही या साठगांठ?
सामुदायिक भवनों के निजी हाथों में संचालन के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे सरकारी नियंत्रण की कमी, संसाधनों का अभाव या निजी संस्थाओं की व्यावसायिक रुचि। लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं दिखता। सरकार के पास इन भवनों को स्वयं संचालित करने की पूरी क्षमता है, फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की अनियमितता को देखकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
टेंडर या एनजीओ की कोई पुष्टि नहीं
सामुदायिक भवनों के संचालन के लिए किसी प्रकार के टेंडर प्रक्रिया या सामाजिक संगठन (एनजीओ) के माध्यम से संचालन की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह सवाल और गहरा करता है कि आखिर इन भवनों का संचालन निजी तौर पर कैसे हो रहा है और इसके पीछे की सच्चाई क्या है।
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