
गणतंत्र दिवस पर गरियाबंद में नक्सलवाद का ‘The End’! 6 महिलाओं समेत 9 नक्सलियों ने डाले हथियार
गरियाबंद | छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को ऐतिहासिक सफलता मिली है। जिले के अंतिम पंक्ति में सक्रिय 9 खूंखार नक्सलियों ने सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 6 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं, जिन्होंने आधुनिक हथियारों के साथ आईजी अमरेश मिश्रा और एसपी वेदव्रत सिरमौर्य के समक्ष सरेंडर किया।
हथियारों का जखीरा सौंपा
इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के दौरान अपने पास मौजूद घातक हथियार भी पुलिस को सौंपे, जिनमें शामिल हैं:
- 3 एके-47 (AK-47) राइफल
- 2 एसएलआर (SLR) राइफल
- 1 .303 राइफल

परिजनों की अपील ने किया कमाल
इस ऐतिहासिक सरेंडर के पीछे एक भावुक कहानी भी है। मुख्य नक्सली लीडर बलदेव और अंजू (जिन पर 8-8 लाख का इनाम था) के परिजनों ने दो दिन पहले ही सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उनसे घर वापसी की भावुक अपील की थी। ‘अपनों की पुकार’ का असर यह हुआ कि पूरी टुकड़ी ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया। यह समूह ओडिशा सीमा और गरियाबंद के राजा डेरा पहाड़ियों में सक्रिय था।
आईजी का बड़ा बयान: “लिस्ट अब खत्म”
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि गरियाबंद जिले में सक्रिय नक्सलियों की सूची अब लगभग समाप्त हो चुकी है। उन्होंने संकेत दिया कि 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के अवसर पर गरियाबंद को औपचारिक रूप से ‘नक्सलमुक्त जिला’ घोषित किया जा सकता है।
नक्सली नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त
गरियाबंद जिले में पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने ‘प्रहार’ अभियान के तहत कई बड़ी मुठभेड़ों में 20 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया था। लगातार बढ़ते दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर अब इस अंतिम सक्रिय टुकड़ी ने भी घुटने टेक दिए हैं।
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