
“टैरिफ झटके के बीच Bharat ने 40 देशों में टेक्सटाइल निर्यात बढ़ाने के लिए खास अभियान शुरू किया”
भारत ने अमेरिकी 50% टैरिफ से उबरने और निर्यात घाटे की भरपाई के लिए 40 प्रमुख वस्त्र-आयातक देशों जैसे यूके, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा आदि में लक्षित बाहरी संपर्क (आउटरीच) कार्यक्रम शुरू किया है। यह रणनीति भारत के वस्त्र निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने के लिए उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

प्रमुख बिंदु:
- इस अभियान का उद्देश्य 40 देशों में भारत को गुणवत्ता, स्थिरता और नवाचार वाले टेक्सटाइल उत्पादों का भरोसेमंद प्रदाता के रूप में स्थापित करना है।
- भारत इन देशों में निर्यात संवर्धन परिषद (EPCs) और भारतीय मिशनों के माध्यम से निर्यातकों का मार्गदर्शन कर बाजार पहुंच बढ़ाएगा।
- 40 देशों में यूरोप, उत्तरी अमेरिका, एशिया, मध्य पूर्व, CIS, और आसियाना क्षेत्र के मुख्य वस्त्र बाजार शामिल हैं।
- भारत के कुल विश्व टेक्सटाइल निर्यात में लगभग 4.1% हिस्सा है, फिर भी यह अवसर नए बाजारों में और बढ़ाने की क्षमता रखता है, जहां भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 5-6% के आसपास है।
- अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव27 अगस्त 2025 से शुरू हुए 50% अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत के वस्त्र, रत्न, समुद्री खाद्य, फुटवियर जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।
- यह टैरिफ भारत के वस्त्र क्षेत्र को बांग्लादेश, वियतनाम और श्रीलंका जैसे अन्य प्रतिस्पर्धियों के सामने महंगा और कम प्रतिस्पर्धी बना देता है।
- उद्योग ने सरकार से वित्तीय और नीति समर्थन की मांग की है ताकि उत्पादन में रुकावट और रोजगार में गिरावट को रोका जा सके।

सरकार की रणनीति और प्रतिक्रिया
- सरकार ने वस्त्र क्षेत्र के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत लगभग 2500 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की योजना बनाई है।
- सरकार ने कच्चे कपास पर 11 प्रतिशत शुल्क हटा दिया है ताकि उत्पादन लागत घटाई जा सके।
- नई व्यापार संधियों के जरिए यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और यूके में व्यापार बढ़ाने की भी पहल हो रही है।
- भारत की यह रणनीति न केवल निर्यात घाटे को कम करने के लिए है, बल्कि वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में भारत के स्थान को सशक्त करने और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भी अहम है।
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