
Gujrat High Court: आपसी सहमति से तलाक में 6 माह की कूलिंग ऑफ अवधि अनिवार्य नहीं
अहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) की धारा 13B को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आपसी सहमति से तलाक के मामलों में 6 महीने की कूलिंग ऑफ अवधि हर हाल में अनिवार्य नहीं है।

फैमिली कोर्ट का आदेश किया निरस्त
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पति-पत्नी की आपसी सहमति से तलाक की याचिका को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत 6 महीने की प्रतीक्षा अवधि पूरी नहीं हुई है।
कूलिंग ऑफ अवधि को बताया प्रक्रियात्मक
न्यायालय ने कहा कि धारा 13B के तहत दी गई 6 माह की कूलिंग ऑफ अवधि अनिवार्य नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक है। यदि दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद सुलझ चुके हों और साथ रहने की कोई संभावना न हो, तो अदालत इस अवधि को माफ कर सकती है।
दंपतियों को मिलेगा राहत
कोर्ट के इस फैसले से उन दंपतियों को बड़ी राहत मिलेगी, जो आपसी सहमति से विवाह विच्छेद चाहते हैं और पहले ही लंबे समय से अलग रह रहे हैं।
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