
अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE से छूट पर याचिका, Supreme Court की सख्त टिप्पणी
याचिका पर शीर्ष अदालत का कड़ा रुख
अल्पसंख्यक स्कूलों को शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम से छूट दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इसे न्याय व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए याचिकाकर्ताओं और उनके वकीलों पर नाराजगी जाहिर की।
“यह न्याय व्यवस्था के खिलाफ होगा”
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया और व्यवस्था के विपरीत हैं। अदालत ने सवाल उठाया कि पहले से स्थापित कानूनी स्थिति के बावजूद इस तरह की याचिका क्यों दायर की गई।

वकीलों की भूमिका पर उठाए सवाल
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,
“यहां क्या हो रहा है? क्या वकील इस तरह की सलाह दे रहे हैं? हमें वकीलों पर जुर्माना लगाना होगा।”
अदालत ने यह भी कहा कि वकील कानून के जानकार और पेशेवर होते हैं, ऐसे में उनसे अधिक जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।
अनुच्छेद 32 के दुरुपयोग पर चिंता
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दाखिल कर रहे हैं, जबकि इस न्यायालय के पूर्व निर्णयों से यह मुद्दा पहले ही स्पष्ट हो चुका है। ऐसे मामलों में अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
पहले से स्पष्ट है कानूनी स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को RTE अधिनियम से छूट देने को लेकर पहले ही स्पष्ट कानूनी व्याख्या मौजूद है। इसके बावजूद उसी मुद्दे पर बार-बार याचिकाएं दायर करना अदालत के समय और संसाधनों की बर्बादी है।
जुर्माना लगाने का दिया संकेत
अदालत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस तरह की गैर-जरूरी और आधारहीन याचिकाओं पर भविष्य में वकीलों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग रोका जा सके।
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