
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ से सरकारी बंगला तुरंत खाली करने की मांग की
नई दिल्ली, 6 जुलाई 2025:
सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी. वाई. चंद्रचूड़ से मुख्य न्यायाधीश के आधिकारिक आवास, 5 कृष्णा मेनन मार्ग, को तुरंत खाली करने की मांग की है। यह बंगला, जो लुटियंस दिल्ली में स्थित है, वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के लिए नामित है, लेकिन चंद्रचूड़, जो नवंबर 2022 से नवंबर 2024 तक भारत के 50वें CJI रहे, अपनी सेवानिवृत्ति के आठ महीने बाद भी इसे खाली नहीं कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 1 जुलाई 2025 को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) को लिखे पत्र में कहा कि चंद्रचूड़ को बंगले में रहने की अनुमति 31 मई 2025 को समाप्त हो चुकी है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट जज (संशोधन) नियम, 2022 के नियम 3बी के तहत सेवानिवृत्त CJI को अधिकतम छह महीने तक टाइप VII बंगले (कृष्णा मेनन मार्ग के बंगले से एक स्तर नीचे) में रहने की अनुमति है, जो 10 मई 2025 को समाप्त हो चुकी है। पत्र में MoHUA से बंगले को “बिना किसी और देरी के” कब्जे में लेने और इसे सुप्रीम कोर्ट के आवास पूल में वापस करने का अनुरोध किया गया है।
चंद्रचूड़ का पक्ष: पारिवारिक कारणों से देरी
पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने इस देरी के लिए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी दो बेटियों को नेमालाइन मायोपैथी, एक दुर्लभ आनुवंशिक न्यूरोमस्कुलर विकार, है, जिसके लिए वे AIIMS में विशेषज्ञों द्वारा इलाज करवा रही हैं। चंद्रचूड़ ने बताया कि वर्तमान बंगले में उनकी बेटी की जरूरतों के लिए ICU जैसी सुविधा स्थापित की गई है, जिसके कारण उपयुक्त वैकल्पिक आवास ढूंढना मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने उन्हें एक वैकल्पिक किराए का आवास आवंटित किया है, जो तुगलक रोड पर स्थित है, लेकिन यह दो साल से बंद पड़ा था और इसे रहने लायक बनाने के लिए व्यापक नवीकरण की जरूरत है। “हमारा सामान पैक हो चुका है। जैसे ही नया घर तैयार होगा, मैं अगले ही दिन वहां चला जाऊंगा,” चंद्रचूड़ ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह वाकिफ हैं, क्योंकि उन्होंने देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर कार्य किया है।
अनुमति और विस्तार का इतिहास
चंद्रचूड़ ने 18 दिसंबर 2024 को तत्कालीन CJI संजीव खन्ना को पत्र लिखकर 30 अप्रैल 2025 तक बंगले में रहने की अनुमति मांगी थी, जिसे मंजूरी दे दी गई थी। इसके लिए उन्हें प्रति माह लगभग 5,430 रुपये का लाइसेंस शुल्क देना था। बाद में, उन्होंने मौखिक रूप से 31 मई 2025 तक विस्तार का अनुरोध किया, जिसे CJI खन्ना ने इस शर्त के साथ स्वीकार किया कि कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा, क्योंकि नए जजों के लिए दिल्ली में आवास की कमी है।
हालांकि, चंद्रचूड़ ने अप्रैल में एक और पत्र लिखकर 30 जून 2025 तक विस्तार मांगा, जिसका उल्लेख सुप्रीम कोर्ट के पत्र में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि दोनों समय-सीमाएं – विशेष अनुमति और वैधानिक छह महीने की अवधि – समाप्त हो चुकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की चिंता: आवास की कमी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पत्र में बताया कि वर्तमान में चार जजों को सरकारी आवास आवंटित नहीं किया गया है, जिनमें से एक स्टेट गेस्ट हाउस में रह रहा है, जबकि अन्य ट्रांजिट अपार्टमेंट में हैं। इस आवास संकट के कारण, कोर्ट को कृष्णा मेनन मार्ग के बंगले की तत्काल आवश्यकता है।
दिलचस्प बात यह है कि चंद्रचूड़ के दोनों उत्तराधिकारी, पूर्व CJI संजीव खन्ना और वर्तमान CJI भूषण आर. गवई, ने इस बंगले में जाने का विकल्प नहीं चुना और अपनी पहले की आवास व्यवस्था में ही रह रहे हैं।
एक असामान्य कदम
सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को इस तरह का पत्र लिखना एक दुर्लभ और अभूतपूर्व कदम है। हालांकि, अतीत में पूर्व CJI को व्यक्तिगत जरूरतों या व्यवस्थाओं के लिए कुछ महीनों का विस्तार अनौपचारिक रूप से दिया गया है, लेकिन इस तरह का औपचारिक पत्र पहले कभी नहीं लिखा गया।
चंद्रचूड़ ने अपने बयान में कहा कि वह जल्द से जल्द बंगला खाली करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और उन्होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के जजों और अधिकारियों के साथ भी चर्चा की है।
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