
Supreme court ने कुत्तों पर फैसला सुरक्षित रखा, सरकार बोली – कई लोग चिकन खाकर बनते हैं पशु प्रेमी
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक और सुनवाई चल रही है। इस मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि कई लोग मांसाहारी भोजन, जैसे चिकन खाकर, खुद को पशु प्रेमी के रूप में पेश करते हैं। यह बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच ने शुरू की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त, 2025 को दिए गए अपने पिछले आदेश के बाद, जिसमें दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था, इस मामले की समीक्षा के लिए एक नई तीन जजों की बेंच का गठन किया। इस बेंच में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया शामिल हैं। यह सुनवाई 14 अगस्त, 2025 को शुरू हुई, और कोर्ट ने इस मामले में अंतरिम याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

सरकार का तर्क: “मूक पीड़ितों की अनदेखी”
सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट में कहा, “इस मामले में दो पक्ष हैं। एक मुखर बहुमत है, जो आवारा कुत्तों के पक्ष में बोलता है, और दूसरा वह मूक समूह है, जो कुत्तों के काटने और रेबीज जैसी समस्याओं से पीड़ित है।” सरकार ने यह भी तर्क दिया कि कई लोग, जो मांसाहारी भोजन करते हैं, जैसे चिकन, अब खुद को पशु प्रेमी के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा में है, जहां कई लोगों ने इसे विडंबनापूर्ण बताया।

पशु प्रेमियों और कार्यकर्ताओं का विरोध
सुप्रीम कोर्ट के 11 अगस्त के आदेश के बाद, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में ले जाने और उन्हें सड़कों पर वापस न छोड़ने का निर्देश दिया गया था, पशु प्रेमियों और कार्यकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया। दिल्ली के इंडिया गेट के पास कई कार्यकर्ता और पशु प्रेमी प्रदर्शन करते हुए नजर आए, जिनमें से कुछ को हिरासत में भी लिया गया। पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने इस आदेश को “अव्यवहारिक, अतार्किक और गैरकानूनी” करार दिया।

आवारा कुत्तों की समस्या: आंकड़े और चुनौतियां
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में इस साल अब तक 26,000 कुत्तों के काटने के मामले दर्ज किए गए हैं, और 31 जुलाई तक 49 रेबीज के मामले सामने आए हैं। जनवरी से जून के बीच 65,000 से अधिक आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण किया गया है। पशु प्रेमियों का तर्क है कि दिल्ली सरकार के पास अपने आश्रय स्थल नहीं हैं, और इस तरह का आदेश अवास्तविक और क्रूर है। उनका कहना है कि नसबंदी और टीकाकरण जैसे दीर्घकालिक उपाय अधिक प्रभावी और मानवीय हैं।
क्या होगा अगला कदम?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, और अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि कोर्ट का अंतिम आदेश क्या होगा। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने 100 से अधिक आवारा कुत्तों को पकड़ लिया है और 20 पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों को आश्रय स्थलों में बदल दिया है। MCD ने बाहरी दिल्ली के घोघा डेयरी में 85 एकड़ का एक भूखंड भी चिह्नित किया है, जहां बड़े पैमाने पर आश्रय स्थल बनाए जाएंगे।
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