
Supreme Court ने CrPC धारा 319 के तहत ट्रायल में जोड़े गए आरोपी के लिए जमानत नियम तय किए
सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 319 के तहत मुकदमे के दौरान अतिरिक्त आरोपी बनाए गए व्यक्ति को जमानत देने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे आरोपी को जमानत से वंचित करने के लिए मजबूत और ठोस सबूतों की जरूरत होगी।
मामला की पृष्ठभूमि
यह मामला झारखंड से जुड़ा है, जहां एक हत्या की FIR में नौ लोगों के नाम थे, लेकिन पुलिस ने केवल तीन के खिलाफ चार्जशीट दायर की और बाकी छह के खिलाफ जांच बंद कर दी। ट्रायल के दौरान अभियोजन गवाहों ने सभी नौ आरोपियों का नाम लिया, जिसके बाद 2022 में धारा 319 के तहत आवेदन दायर किया गया। ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता एमडी इमरान उर्फ डीसी गुड्डू सहित तीन लोगों को अतिरिक्त आरोपी के रूप में तलब किया।

अपीलकर्ता को गैर-जमानती वारंट पर गिरफ्तार किया गया और झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, अन्य दो नए तलब किए गए आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल गई।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि धारा 319 के तहत जोड़े गए आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करते समय सिर्फ संलिप्तता की संभावना नहीं, बल्कि मजबूत और ठोस सबूतों को आधार बनाना चाहिए।
कोर्ट ने जमानत पर विचार के लिए निम्नलिखित टेस्ट निर्धारित किया:
- सबूत प्रथम दृष्टया (prima facie) मामले से ज्यादा मजबूत होने चाहिए, जो आरोप तय करने के लिए पर्याप्त होता है।
- हालांकि, इतने उच्च स्तर की संतुष्टि की जरूरत नहीं कि सबूतों का खंडन न होने पर दोषसिद्धि निश्चित हो।
- आरोपी की मिलीभगत दिखाने वाले ठोस सबूत होने चाहिए, जो लगातार हिरासत को न्यायोचित ठहराएं।
कोर्ट ने आगे कहा, “जो टेस्ट लागू किया जाना है, वह चार्ज फ्रेम करते समय इस्तेमाल किए गए प्राइमा फेसी केस से ज्यादा होना चाहिए, लेकिन इस हद तक संतुष्टि से कम होना चाहिए कि अगर सबूतों को चुनौती न दी जाए तो सजा हो सकती है।”
अन्य कारकों में अपराध की प्रकृति, नए आरोपी के खिलाफ सबूतों की गुणवत्ता, भागने या सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना शामिल है।
परिणाम और प्रभाव
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ता की जमानत याचिका मंजूर कर उन्हें रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही, अन्य सह-आरोपियों को अग्रिम जमानत देने के खिलाफ राज्य की अपील खारिज कर दी गई। समानता के सिद्धांत का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जब सह-आरोपी जमानत पर हैं, तो अपीलकर्ता के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
मामला: एमडी इमरान उर्फ डीसी गुड्डू बनाम झारखंड राज्य
यह फैसला धारा 319 के तहत जोड़े गए आरोपियों के लिए जमानत प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और न्यायसंगत बनाता है, जिससे अनावश्यक हिरासत को रोका जा सकेगा।
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