
Supreme Court ने CBI की निष्क्रियता पर लगाई फटकार
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में एक हिरासत मृत्यु मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सीबीआई को दो पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी में विफलता के लिए आड़े हाथों लिया और स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में सीबीआई “लाचारी का बहाना” नहीं बना सकती। यह मामला मध्य प्रदेश के देवा पारधी की हिरासत में मृत्यु और एकमात्र गवाह गंगाराम पारधी के साथ पुलिस द्वारा किए गए उत्पीड़न से संबंधित है।

हिरासत में मृत्यु और पुलिस उत्पीड़न का मामला
मध्य प्रदेश में देवा पारधी की हिरासत में मृत्यु के मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। इस मामले में दो पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप हैं, लेकिन सीबीआई उनकी गिरफ्तारी में अब तक नाकाम रही है। कोर्ट ने इस निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीबीआई को अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
गवाह गंगाराम पारधी का उत्पीड़न
इस मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह गंगाराम पारधी ने पुलिस द्वारा लगातार उत्पीड़न का आरोप लगाया है। गंगाराम ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने उन्हें चुप कराने और गवाही देने से रोकने के लिए दबाव बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने इस उत्पीड़न को गंभीरता से लिया और सीबीआई से इसकी जांच करने के साथ-साथ गवाह की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रवैया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि हिरासत में मृत्यु जैसे गंभीर मामलों में सीबीआई की निष्क्रियता अस्वीकार्य है। कोर्ट ने कहा, “सीबीआई एक स्वतंत्र और सक्षम जांच एजेंसी है। इसे अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए दोषियों को सजा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए।” कोर्ट ने सीबीआई को जल्द से जल्द दोनों पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार करने और मामले की जांच को तेज करने का निर्देश दिया।
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