
Supreme Court का बड़ा फैसला : वंतारा में जानवरों की खरीद नियमों के तहत, SIT Report में गड़बड़ी नहीं
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर 2025) को कहा कि गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस फाउंडेशन द्वारा संचालित वंतारा (ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर) में जानवरों की खरीद-बिक्री और अधिग्रहण नियमों के तहत हुआ है और इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं पाई गई।

यह निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में दिया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर ने की थी। SIT की जांच का दायरा भारत और विदेश से खासकर हाथियों सहित जानवरों की खरीद में कानूनी अनुपालनों की पड़ताल करना था।
कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा – “जानवरों का अधिग्रहण नियामकीय अनुपालन के तहत हुआ है।”
कोर्ट ने कहा कि SIT की स्वतंत्र रिपोर्ट स्वीकार की जाती है और उसी आधार पर आदेश जारी किया जाएगा।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अब इस मामले पर बार-बार आपत्ति उठाने या सवाल खड़ा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि जब किसी स्वतंत्र कमेटी ने जांच की है और विशेषज्ञों की राय ली गई है, तब इसपर अनावश्यक विवाद नहीं होना चाहिए।
गोपनीयता पर बहस
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने रिपोर्ट को प्रकाशित करने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जानवरों की देखरेख से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनावश्यक अटकलें लग सकती हैं। इस पर बेंच ने कहा कि वह रिपोर्ट को स्वीकार कर रही है और इसे लेकर किसी तरह के बेमतलब विवाद को अनुमति नहीं दी जाएगी।

कोर्ट का दृष्टिकोण
कोर्ट ने कहा कि अगर कानून का पालन करते हुए हाथियों का अधिग्रहण किया गया है तो इसमें आपत्ति की कोई वजह नहीं है। यदि आप मंदिरों में हाथियों को रखते हैं, धार्मिक जुलूसों और दशहरा जैसे आयोजनों में उपयोग करते हैं, तो इसमें भी कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। वंतारा ने भी इन्हीं प्रावधानों के तहत कार्य किया है।अदालत ने इसे देश की “गौरव की बात” बताते हुए कहा कि ऐसे सकारात्मक कार्यों पर अनावश्यक विवाद न खड़ा किया जाए।
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