
Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला: शादी टूटने पर पत्नी को 1.25 करोड़ रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता
19 अगस्त 2025, नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े फैसले में पति को अपनी पत्नी को 1.25 करोड़ रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दिया गया, जिसमें कोर्ट को पूर्ण न्याय की शक्तियाँ प्राप्त हैं।
इस फैसले में अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि पति यह राशि पांच समान त्रैमासिक किश्तों (हर एक किश्त 25 लाख रुपये) में 15 सितंबर 2025 से देना शुरू करेगा।

मामला क्या था?
इस केस में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई की, जिसमें पत्नी द्वारा क्रूरता के आधार पर फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दिए गए तलाक के आदेश को रद्द कर दिया गया था।
पीठ के सामने यह तथ्य आया कि पति और पत्नी 2010 से अलग रह रहे हैं और विवाह संबंध लगभग 15 वर्षों से अस्तित्वहीन हैं। पति ने 05 मार्च 2017 को दोबारा विवाह भी कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इतना लंबा पृथक्करण, मेल-मिलाप की सभी कोशिशें असफल रहना, और पति का पुनर्विवाह, विवाह के पूरी तरह टूटने का स्पष्ट प्रमाण हैं। कोर्ट ने कहा, “दोनों पक्षों के बीच कोई सुलह की संभावना नहीं बची है, और इस परिस्थिति में कानूनी संबंध बनाए रखना केवल औपचारिकता रह जाएगा।”

अलिम्मनी और अदालती निर्णय
पत्नी और बच्चे को पति से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल रही थी, इस कारण अदालत ने पति को 1,25,00,000 रुपये (एक करोड़ पच्चीस लाख रुपये) स्थायी भरण-पोषण के रूप में देने का आदेश दिया।
यह राशि 15 सितंबर 2025 से शुरू होकर हर तीन महीने में 25 लाख रुपये की किश्त में चुकानी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने आपसी संपूर्ण न्याय को ध्यान में रखते हुए अपील को स्वीकार किया और मद्रास उच्च न्यायालय का आदेश रद्द करते हुए विवाह को अधिकारिक रूप से भंग कर दिया।
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