
Supreme Court का अहम फैसला: मूल याचिका खारिज होने पर भी अपीलेट कोर्ट दे सकता है अंतरिम राहत
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी मामले में मूल याचिका (ओरिजिनल केस) खारिज भी हो जाए, तब भी अपीलेट कोर्ट लंबित अपील में उचित अंतरिम राहत दे सकता है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए गुजरात हाईकोर्ट के एक फैसले को रद्द कर दिया।
मूल केस खारिज होना अंतरिम राहत देने में बाधा नहीं: सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत ने कहा कि अपील लंबित रहने के दौरान अंतरिम राहत देने का अधिकार अपीलेट कोर्ट के पास हमेशा रहेगा। बेंच ने कहा— “सिर्फ इसलिए कि ओरिजिनल केस खारिज हो गया, इसका मतलब यह नहीं है कि पेंडिंग अपील में अपीलेट कोर्ट मांगी गई सही राहत नहीं दे सकता।”

गुजरात हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द
गुजरात हाईकोर्ट ने एक वादी की ‘यथास्थिति बनाए रखने’ (स्टेटस-क्वो) की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि मूल केस पहले ही खारिज हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत ठहराते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि अपील में उठाए गए मुद्दों को देखते हुए अंतरिम राहत पर विचार किया जाना चाहिए था।
कानूनी प्रक्रिया में स्पष्टता
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अपीलेट कोर्ट का अधिकार क्षेत्र मूल केस के खारिज होने से प्रभावित नहीं होता। यह निर्णय उन मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा, जहाँ अपील के दौरान वादी अंतरिम संरक्षण की मांग करते हैं।
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