
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘घिनौना कृत्य’ करार, न्यायिक अधिकारी की बहाली पर रोक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेन के कोच में पेशाब करने और हंगामा खड़ा करने के आरोपों का सामना कर रहे एक न्यायिक अधिकारी के मामले में कड़ी टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने इस कथित आचरण को “घिनौना (Disgusting)” बताते हुए संबंधित अधिकारी की बहाली (रीइंस्टेटमेंट) पर रोक लगा दी है।
न्यायपालिका की छवि पर गंभीर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायिक अधिकारी से अपेक्षित आचरण सामान्य नागरिक से कहीं अधिक ऊंचे मानकों वाला होना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का व्यवहार न्यायपालिका की गरिमा और विश्वास को ठेस पहुंचाता है।

बहाली पर रोक बरकरार
शीर्ष अदालत ने निचली अदालत/प्रशासनिक प्राधिकरण के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें आरोपी न्यायिक अधिकारी की सेवा में पुनर्बहाली पर रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर के आरोपों के मद्देनजर तत्काल बहाली उचित नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
उक्त न्यायिक अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने ट्रेन यात्रा के दौरान कोच में पेशाब किया और यात्रियों के साथ विवाद व हंगामा किया। इस घटना के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी, जिसे चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
अदालत का संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के माध्यम से यह संदेश दिया कि न्यायिक पद पर आसीन व्यक्तियों का आचरण अनुकरणीय होना चाहिए और किसी भी प्रकार का अनुशासनहीन या आपत्तिजनक व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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