March 7, 2026
Sukma में बड़ी सफलता: 20 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, लाखों के इनामी भी शामिल

Sukma में बड़ी सफलता: 20 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, लाखों के इनामी भी शामिल

Sep 4, 2025

सुकमा (छत्तीसगढ़): नक्सल प्रभावित दक्षिण बस्तर के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों और प्रशासन को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। यहां 20 माओवादियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से 11 कुख्यात नक्सली पुलिस की वांछित सूची में शामिल थे, जिन पर कुल ₹33 लाख का इनाम घोषित था। यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े नाम
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में दो महिलाएं—शर्मिला उर्फ उइका भीमे और ताती कोसी उर्फ परमिला—विशेष रूप से चर्चा में हैं। इन दोनों पर क्रमशः ₹8-8 लाख का इनाम था। ये दोनों लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थीं और कई हिंसक घटनाओं में शामिल रही थीं। इसके अलावा, अन्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में भी कई ऐसे नाम हैं, जो पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बने हुए थे।

सरकार से आर्थिक व सामाजिक सहयोग
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक नक्सली को ₹50,000 की तत्काल प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही, उन्हें शिक्षा, व्यवसाय और रोजगार के अवसरों के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का मौका मिलेगा। सरकार का यह कदम नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

आत्मसमर्पण की प्रमुख वजहें
अधिकारियों के अनुसार, इस बड़े आत्मसमर्पण के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

सुरक्षा बलों का लगातार दबाव: पुलिस और अर्धसैनिक बलों की सघन कार्रवाइयों ने नक्सलियों की गतिविधियों को काफी हद तक नियंत्रित किया है।

स्थानीय जनता का मोहभंग: ग्रामीण इलाकों में नक्सलियों के प्रति असंतोष बढ़ रहा है। लोग अब हिंसा के बजाय विकास और शांति चाहते हैं।

सरकारी पुनर्वास नीति का आकर्षण: शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा की गारंटी ने कई नक्सलियों को हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया है

सुकमा की चुनौती और बदलती तस्वीर
सुकमा जिला लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां अक्सर सुरक्षा बलों पर बड़े हमले और ग्रामीणों के खिलाफ हिंसक वारदातें होती रही हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाओं से यह संकेत मिल रहा है कि नक्सलियों का प्रभाव कमजोर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की नई तस्वीर उभर सकती है।

 

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