
Sukma में बड़ी सफलता: 20 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, लाखों के इनामी भी शामिल
सुकमा (छत्तीसगढ़): नक्सल प्रभावित दक्षिण बस्तर के सुकमा ज़िले में सुरक्षा बलों और प्रशासन को बड़ी कामयाबी मिली है। यहाँ 20 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें से 11 कुख्यात नक्सली पुलिस की वांछित सूची में शामिल थे। इन पर कुल ₹33 लाख का इनाम घोषित था।

आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े नाम
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से दो महिलाएँ—शर्मिला उर्फ़ उइका भीमे और ताती कोसी उर्फ़ परमिला—विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। दोनों पर क्रमशः ₹8-8 लाख का इनाम घोषित था। ये लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थीं और कई हिंसक वारदातों में वांछित मानी जाती रही हैं।
सरकार से आर्थिक व सामाजिक सहयोग
सभी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार की नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत विशेष लाभ दिए जाएंगे। हर नक्सली को ₹50,000 की तत्काल प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही उन्हें शिक्षा, व्यवसाय और रोजगार की दिशा में सहयोग मिलेगा, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
आत्मसमर्पण की प्रमुख वजहें
- अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं:
- सुरक्षा बलों का लगातार दबाव: पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की सघन कार्रवाई ने नक्सलियों की गतिविधियों पर नियंत्रण किया।
- स्थानीय जनता का मोहभंग: ग्रामीण इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ धीरे-धीरे असंतोष बढ़ रहा है। लोग अब हिंसा नहीं, बल्कि विकास चाहते हैं।
- सरकारी पुनर्वास नीति का आकर्षण: शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा की गारंटी ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
सुकमा की चुनौती और बदलती तस्वीर
सुकमा लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है। यहाँ कई बार सुरक्षा बलों पर बड़े हमले हुए और निर्दोष ग्रामीण भी हिंसा का शिकार बने। लेकिन अब लगातार आत्मसमर्पण की घटनाओं से यह संकेत मिलने लगा है कि नक्सलियों का प्रभाव कमजोर हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान ऐसे ही जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

प्रशासन का बयान
पुलिस अधिकारी का कहना है कि यह आत्मसमर्पण सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक संदेश है—कि जंगलों में हथियार उठा कर हिंसा करने का रास्ता अब असफल हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे और भी नक्सली समाज की मुख्यधारा में लौटेंगे।
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