
Supreme Court ने खारिज की कफ सिरप मौतों की CBI जांच याचिका, राज्य सरकारों पर जताया भरोसा
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2025
मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीले कफ सिरप के सेवन से हुई बच्चों की मौत के मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। उच्चतम न्यायालय ने इस याचिका को खारिज कर दिया और स्पष्ट कहा कि राज्य सरकारें ऐसी घटनाओं की जांच करने में पूरी तरह सक्षम हैं। कोर्ट ने हर छोटे-मोटे मामले में सुप्रीम कोर्ट से निगरानी की मांग को न्यायिक प्रक्रिया पर अविश्वास की तरह करार दिया। इस फैसले से न केवल वर्तमान मामलों की जांच राज्य स्तर पर ही रहेगी, बल्कि भविष्य में दवा सुरक्षा के मुद्दों पर भी नीतिगत बहस तेज हो सकती है।

घटना का पृष्ठभूमि: जहरीले कफ सिरप का कहर
पिछले कुछ महीनों में मध्य प्रदेश और राजस्थान के विभिन्न जिलों से दर्दनाक खबरें सामने आईं, जहां कफ सिरप के सेवन से कम उम्र के कई बच्चों की जान चली गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में कम से कम 20 से अधिक बच्चे और राजस्थान में 15 से ज्यादा बच्चे इस जहरीले सिरप का शिकार बने। ये सिरप मुख्य रूप से सर्दी-खांसी जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए बाजार में उपलब्ध थे, लेकिन इनमें डाई एथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे घातक रसायनों की मिलावट पाई गई। ये रसायन सस्ते विकल्प के रूप में ग्लिसरीन की जगह इस्तेमाल किए जाते हैं, जो बच्चों के किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं।

यह कोई पहली घटना नहीं है। भारत में पिछले पांच वर्षों में ही कफ सिरप या अन्य दवाओं से जुड़ी ऐसी कम से कम छह बड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें सैकड़ों बच्चों की मौत हुई। 2022 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर और 2023 में तमिलनाडु में भी इसी तरह के मामले सामने आए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि दवा निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण की कमी और रसायनों की खरीद पर सख्त निगरानी न होने से ऐसी त्रासदियां दोहराई जा रही हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भी कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार की गति धीमी बनी हुई है।
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