
Ladakh सोनम वांगचुक पर CBI जांच: नया विवाद
लेह, 25 सितंबर 2025 : लद्दाख में पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच एक नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक सुधारक सोनम वांगचुक के खिलाफ विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के कथित उल्लंघन के मामले में औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह जांच गृह मंत्रालय की शिकायत पर आधारित है, जो लगभग दो महीने पहले प्रारंभिक स्तर पर शुरू हुई थी। सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जांच अभी भी जारी है और इसमें हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (एचआईएएल) से जुड़े वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल की जा रही है।

सोनम वांगचुक कौन हैं? एक नजर उनके संघर्ष पर
सोनम वांगचुक लद्दाख के एक प्रमुख पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्हें बॉलीवुड फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में आमिर खान के किरदार का प्रेरणा स्रोत माना जाता है। 1966 में जन्मे वांगचुक ने लद्दाख के दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने ‘स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख’ (एसईसीएमओएल) की स्थापना की, जो स्थानीय युवाओं को वैकल्पिक शिक्षा प्रदान करती है। वांगचुक को 2018 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। हाल के वर्षों में, वे लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद पूर्ण राज्य का दर्जा देने और स्थानीय संस्कृति व पर्यावरण की रक्षा के लिए आंदोलन चला रहे हैं। उनका अनशन और शांतिपूर्ण विरोध केंद्र सरकार को मांगों पर ध्यान दिलाने का माध्यम रहा है।

एफसीआरए उल्लंघन का आरोप: क्या है विवाद का केंद्र?
एफसीआरए एक ऐसा कानून है जो गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेशी फंडिंग प्राप्त करने पर सख्त नियंत्रण लगाता है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा न हो। गृह मंत्रालय की शिकायत के अनुसार, वांगचुक से जुड़े एचआईएएल ने विदेशी दानदाताओं से प्राप्त धनराशि का उपयोग आंदोलन को भड़काने और राजनीतिक गतिविधियों में किया, जो कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। सीबीआई की टीम ने लगभग 10 दिन पहले एचआईएएल के कार्यालयों पर छापा मारा और दस्तावेज जब्त किए। वांगचुक ने पीटीआई न्यूज एजेंसी को दिए बयान में कहा, “सीबीआई की टीम एक आदेश लेकर आई थी, जिसमें गृह मंत्रालय की शिकायत पर एफसीआरए उल्लंघन का जिक्र था। हम पारदर्शी तरीके से काम करते हैं और सभी दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं। यह जांच हमारे शांतिपूर्ण संघर्ष को कमजोर करने की कोशिश लगती है।”
जांच के दायरे में एचआईएएल को प्राप्त विदेशी फंडिंग के स्रोत, उनके उपयोग और आंदोलन से जुड़े खर्चों की जांच हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह एनजीओ पर जुर्माना या लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई का कारण बन सकता है। पिछले वर्षों में कई प्रमुख एनजीओ जैसे ग्रीनपीस और अन्य पर इसी कानून के तहत जांच हुई है, जो सिविल सोसाइटी पर केंद्र सरकार के बढ़ते नियंत्रण को दर्शाती है।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



