
सिवगंगा हिरासत मृत्यु मामला: मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजे का आदेश दिया
22 जुलाई 2025
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु सरकार को सिवगंगा जिले में हिरासत में हुई मृत्यु के मामले में मृतक अजित कुमार के परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह आदेश मंगलवार, 22 जुलाई 2025 को पारित किया गया, जब न्यायालय ने इस मामले में जनहित याचिकाओं की सुनवाई की। अजित कुमार, एक 28 वर्षीय मंदिर सुरक्षा गार्ड, की पिछले महीने पुलिस हिरासत में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद व्यापक सार्वजनिक आक्रोश फैल गया।
मामले का पृष्ठभूमि
अजित कुमार, जो सिवगंगा जिले के मदपुरम कालियम्मन मंदिर में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे, को चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए पुलिस ने हिरासत में लिया था। एक महिला भक्त ने दावा किया था कि उनकी कार से नकदी और सोने के आभूषण गायब हो गए, जिसके लिए अजित को जिम्मेदार ठहराया गया। हालांकि, अजित ने कार पार्क करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति की मदद ली थी क्योंकि वह खुद ड्राइविंग नहीं जानते थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर 44 चोटों के निशान पाए गए, जो हिरासत में यातना की ओर इशारा करते हैं।
न्यायालय का कड़ा रुख
मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया और टिप्पणी की कि “यहां तक कि एक हत्यारा भी इतनी क्रूरता से हमला नहीं करता।” न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और ए.डी. मारिया क्लीट की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा पहले दिए गए 7.5 लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त माना और अतिरिक्त 25 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक कार्यवाही पूरी होने के बाद परिवार और मुआवजे के लिए आवेदन कर सकता है।
सीबीआई जांच और सरकारी कार्रवाई
तमिलनाडु सरकार ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है, जिसने 12 जुलाई को सिवगंगा क्राइम ब्रांच के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। सीबीआई को 20 अगस्त तक अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, और सिवगंगा के पुलिस अधीक्षक को अनिवार्य प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने अजित के परिवार से माफी मांगी और उनके भाई को सरकारी नौकरी और मां को जमीन प्रदान की गई है।
गवाहों की सुरक्षा
न्यायालय ने सिवगंगा के प्रधान जिला न्यायाधीश को निर्देश दिया कि गवाह संरक्षण योजना के तहत गवाहों की सुरक्षा के लिए आवेदनों पर सात कार्य दिवसों के भीतर निर्णय लिया जाए। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि गवाहों को धमकियां मिल रही हैं, जिसके कारण यह कदम उठाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में पारदर्शिता और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए अंतरिम मुआवजा देना आवश्यक है।
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