
शशांक चोपड़ा की ज़मानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज, 411 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में चल रही है जांच
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 411 करोड़ रुपये के बहुचर्चित स्वास्थ्य विभाग घोटाले में आरोपी कारोबारी शशांक चोपड़ा की नियमित ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने यह निर्णय दिया।
मामला वर्ष 2023 में “हमर-लैब योजना” के तहत विभिन्न चिकित्सा उपकरणों और रसायनों की ख़रीद में हुई कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। एफआईआर के अनुसार, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) ने बिना बजट अनुमोदन और आवश्यकता आकलन के उपकरणों की भारी मात्रा में ख़रीद की, जिससे राज्य सरकार को 411 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
शशांक चोपड़ा की कंपनी मोक्षित कॉर्पोरेशन पर आरोप है कि उसने रक्त सैंपल के लिए आवश्यक EDTA ट्यूब ₹8.50 की जगह ₹2352 प्रति टुकड़ा दर पर आपूर्ति की। वहीं ₹5 लाख मूल्य के CBC मशीनों को ₹17 लाख में बेचा गया। आरोप है कि शशांक ने अधिकारियों के साथ साठगांठ कर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया और मनमाफिक दरों पर सप्लाई के अनुबंध हासिल किए।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ मृदुल ने दलील दी कि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी थी और कंपनी को गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक दर ₹23.52 थी, ₹2352 नहीं। साथ ही, कंपनी का 351 करोड़ का बकाया भी अब तक नहीं चुकाया गया है।
हालाँकि, राज्य सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल डॉ. सौरभ पांडे ने विरोध करते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है, जिसमें सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से राज्य को बड़ा नुकसान हुआ है। कोर्ट ने माना कि यह संगठित अपराध है, और आरोपी द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे आर्थिक अपराध समाज की आर्थिक संरचना को हिला देते हैं और न्याय प्रणाली पर लोगों का विश्वास डगमगा सकते हैं। इसलिए इस स्तर पर ज़मानत देना उचित नहीं होगा l
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