
SBI ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के ऋण को ‘धोखाधड़ी’ घोषित किया, अनिल अंबानी का नाम आरबीआई को भेजा
मुंबई, 4 जुलाई , 2025
रिलायंस कम्युनिकेशंस पर धोखाधड़ी का आरोप
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने संकटग्रस्त दूरसंचार कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के ऋण खाते को ‘धोखाधड़ी’ के रूप में वर्गीकृत कर इसके पूर्व निदेशक अनिल अंबानी का नाम भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को रिपोर्ट करने का फैसला किया है। नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, आरकॉम और उसकी सहायक कंपनियों को बैंकों से कुल 31,580 करोड़ रुपये का ऋण मिला था, जिसमें उपयोग में अनियमितताएं पाई गई हैं।
एसबीआई का पत्र और जांच
आरकॉम को 23 जून 2025 को भेजे गए पत्र में एसबीआई ने कहा कि कंपनी के ऋण खाते में फंड के उपयोग में विचलन पाया गया, जिसमें समूह की विभिन्न संस्थाओं के बीच जटिल धन हस्तांतरण शामिल है। बैंक की धोखाधड़ी पहचान समिति ने आरकॉम के जवाबों की जांच के बाद खाते को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया। समिति ने पाया कि कंपनी ने ऋण दस्तावेजों की शर्तों का पालन नहीं किया और अनियमितताओं को स्पष्ट करने में विफल रही।
ऋण के दुरुपयोग का विवरण
रिपोर्ट के अनुसार, कुल 31,580 करोड़ रुपये के ऋण में से 13,667.73 करोड़ रुपये (लगभग 44%) का उपयोग ऋण और अन्य दायित्वों के पुनर्भुगतान के लिए किया गया। वहीं, 12,692.31 करोड़ रुपये (41%) संबंधित पक्षों को भुगतान के लिए इस्तेमाल हुए। इसके अलावा, 6,265.85 करोड़ रुपये अन्य बैंक ऋणों के भुगतान और 5,501.56 करोड़ रुपये समूह की कंपनियों को गैर-स्वीकृत उद्देश्यों के लिए दिए गए।
विशिष्ट अनियमितताएं
- देना बैंक ऋण: 250 करोड़ रुपये का ऋण, जो वैधानिक बकाया के लिए था, रिलायंस कम्युनिकेशंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (आरसीआईएल) को अंतर-कॉर्पोरेट जमा (आईसीडी) के रूप में हस्तांतरित किया गया और बाद में बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) चुकाने के लिए उपयोग किया गया।
- IIFCL ऋण: पूंजीगत व्यय के लिए स्वीकृत 248 करोड़ रुपये का ऋण रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड (आरआईटीएल) और अन्य समूह कंपनियों को हस्तांतरित किया गया, जो स्वीकृत उद्देश्यों के अनुरूप नहीं था।
धोखाधड़ी का प्रभाव
आरबीआई दिशानिर्देशों के अनुसार, धोखाधड़ी वाले खातों के उधारकर्ताओं, उनके प्रमोटरों और निदेशकों को धोखाधड़ी की राशि का पूर्ण भुगतान होने के बाद पांच साल तक बैंकों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी NBFC से ऋण लेने से वंचित किया जाएगा। इसके बाद भी, ऋण देने का निर्णय संस्थानों पर निर्भर करेगा, और धोखाधड़ी वाले खातों का पुनर्गठन या अतिरिक्त सुविधाएं नहीं दी जा सकतीं।
आरकॉम की स्थिति
रिलायंस कम्युनिकेशंस वर्तमान में दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है। 28 जून 2019 से कंपनी का प्रबंधन रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल अनीश निरंजन नानावटी के पास है, जिन्हें नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई द्वारा नियुक्त किया गया था।
आगे की कार्रवाई
एसबीआई ने आरबीआई को धोखाधड़ी की रिपोर्ट करने के साथ-साथ सीबीआई/पुलिस को भी सूचित करने की प्रक्रिया शुरू की है। अन्य ऋणदाता बैंकों के भी इसी तरह के कदम उठाने की उम्मीद है। इस मामले में आगे की जांच से समूह की अन्य संस्थाओं और लेनदेन की और जानकारी सामने आ सकती है।
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