
सबरीमाला मंदिर सोना गबन मामला: ED ने 21 ठिकानों पर की छापेमारी, तांबे की प्लेट बताकर सोना निकाला गया; 1.3 करोड़ की संपत्ति फ्रीज
कोच्चि/तिरुवनंतपुरम, 21 जनवरी 2026 – सबरीमाला भगवान अय्यप्पा मंदिर से जुड़े सोने के गबन के बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा एक्शन लिया है। ईडी की कोच्चि जोनल ऑफिस ने मंगलवार को केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में कुल 21 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। जांच में सामने आया है कि मंदिर की पवित्र सोने की परत चढ़ी कलाकृतियों को जानबूझकर ‘तांबे की प्लेट’ बताकर रिकॉर्ड में दर्ज किया गया और गुप्त रूप से सोना निकाला गया।

सुनियोजित साजिश का खुलासा
केरल पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच से पता चला कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों, पूर्व प्रशासकों, निजी व्यक्तियों और जौहरियों की मिलीभगत से यह आपराधिक साजिश रची गई। 2019 से 2025 के बीच मंदिर की पवित्र कलाकृतियां – जैसे द्वारपालक मूर्तियों के हिस्से, पीठ (पेडेस्टल) और गर्भगृह के दरवाजे के फ्रेम पैनल – को गुप्त रूप से मंदिर से हटाया गया।
इन कलाकृतियों को चेन्नई और कर्नाटक की निजी ज्वैलरी सुविधाओं (जैसे स्मार्ट क्रिएशन्स और रोड्डम ज्वैलर्स) में ले जाकर ‘मरम्मत और री-गोल्ड प्लेटिंग’ के नाम पर रासायनिक प्रक्रियाओं से सोना निकाला गया। निकाला गया सोना अपराध की आय माना जा रहा है, जिसे आरोपियों ने रखा, स्थानांतरित किया और छिपाया।
छापेमारी में क्या-क्या जब्त हुआ?
ईडी ने टीडीबी मुख्यालय (तिरुवनंतपुरम), मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी, पूर्व टीडीबी अध्यक्ष ए. पद्मकुमार, मुरारी बाबू, एन. वासु, तांत्री कंदारारु राजीवरु आदि के आवासों पर तलाशी ली। जब्त सामग्री में शामिल हैं:
- टीडीबी अधिकारियों द्वारा तैयार महाजर और आधिकारिक रिकॉर्ड
- 2019-2024 के बीच के आदेश, पत्राचार
- जौहरियों के चालान, भुगतान दस्तावेज
- रासायनिक निष्कर्षण से जुड़े वारंटी प्रमाण पत्र
चेन्नई के स्मार्ट क्रिएशन्स परिसर से 100 ग्राम सोने की ईंट भी जब्त की गई। मुख्य आरोपी की लगभग 1.3 करोड़ रुपये की आठ अचल संपत्तियां पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज कर दी गईं।
जांच का दायरा और भक्तों में रोष
यह मामला 2019 से चर्चा में है, जब सोने की परत हटाने के आरोप सामने आए थे। केरल हाई कोर्ट की निगरानी में एसआईटी ने अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। ईडी ने 9 जनवरी 2026 को पीएमएलए के तहत ईसीआईआर दर्ज किया था। जांच से पता चल रहा है कि यह केवल सोने का गबन नहीं, बल्कि मंदिर के चढ़ावे, अनुष्ठानों से जुड़ी व्यवस्थित अनियमितताएं, आय का दुरुपयोग और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का बड़ा घोटाला है।
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