
SAHARA समूह मामले में ईडी की कार्रवाई: जितेंद्र प्रसाद वर्मा और अनिल विलापरम्पिल अब्राहम पर पीएमएलए के तहत आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता ने सहारा समूह से जुड़े एक बड़े धन शोधन मामले में अहम कार्रवाई की है। इस मामले में जितेंद्र प्रसाद वर्मा और अनिल विलापरम्पिल अब्राहम को गिरफ्तार करने के 60 दिनों के भीतर धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) की धारा 44 के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की गई है। इस शिकायत में दोनों के साथ-साथ अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं को भी आरोपी बनाया गया है, जो इस कथित वित्तीय अपराध से जुड़े हैं।

मामले का इतिहास और अभियोजन शुल्क
सहारा समूह एक बहुप्रशांत और विवादित कॉर्पोरेट समूह है, जिसके खिलाफ पिछले कई वर्षों से वित्तीय अनियमितताओं और कानूनी विवादों की जांच जारी है। इस मामले में ईडी ने आरोप लगाया है कि धन शोधन की प्रक्रिया के जरिए अवैध धन का सफेद-सफेद किया गया। जितेंद्र प्रसाद वर्मा और अनिल विलापरम्पिल अब्राहम पर इन गतिविधियों को अंजाम देने में संलिप्तता का आरोप है।

भारत के धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 44 विशेष रूप से उन मामलों पर लागू होती है जहां अभियोजन के लिए मानकों और प्रक्रियाओं का अनुसरण करना होता है। इस अधिनियम के अंतर्गत ईडी ने संबंधित आरोपियों की पहचान कर प्राथमिकी दर्ज की है, जो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की शुरुआत है।
गिरफ्तारी और जांच प्रक्रिया
ईडी ने आरोपितों को गिरफ्तार कर जवाब-तलब किया था और उनकी हिरासत में पूछताछ की गई। इस दौरान विभिन्न दस्तावेज़, वित्तीय लेन-देन और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 60 दिनों के भीतर उन्हें अदालत में पेश कर अभियोजन शिकायत दर्ज की गई, जो जांच की गंभीरता और मामले की जटिलता को दर्शाता है।
ईडी की जांच प्रक्रिया में अन्य आरोपितों और संस्थाओं की भी पहचान की जा रही है जो इस कथित आपराधिक वित्तीय नेटवर्क में शामिल हैं। इसके साथ ही, इस मामले में अब तक सीबीआई सहित कई अन्य एजेंसियां भी शामिल होकर सहयोग कर रही हैं।
सहारा समूह की छवि पर प्रभाव और कानूनी कार्रवाई
यह मामला सहारा समूह की छवि पर एक बड़ा धक्का माना जा रहा है, क्योंकि वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और वैधानिकता पर सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही, यह कार्रवाई भारत में बड़े कॉरपोरेट फाइनेंस के क्षेत्र में प्रतिष्ठित नियमों और कानूनों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ईडी ने ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई को जारी रखने का भरोसा दिया है ताकि निवेशकों और आम जनता का विश्वास सिस्टम में बना रहे।
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