
संसद में Amit Sah के तीन बड़े कानून: राजनीति में जवाबदेही और सख्त प्रक्रिया का प्रस्ताव
21 अगस्त 2025 को संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में तीन महत्वपूर्ण कानून प्रस्तुत किए, जिनका उद्देश्य है— सरकार में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक राजनीति की मजबूती।

1. राजनीतिक पदाधिकारी जवाबदेही अधिनियम 2025
इस अधिनियम के तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री भ्रष्टाचार, हत्या, बलात्कार, आतंकवाद, या राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर अपराध में संलिप्त पाए जाते हैं और प्राथमिकी दर्ज हो जाती है, तो:
उनके खिलाफ 72 घंटे के भीतर एक विशेष न्यायिक पैनल गठित किया जाएगा।
इस पैनल को 90 दिनों के अंदर मामले की सुनवाई पूरी कर नतीजा देना अनिवार्य होगा।दोषी पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारी को तत्काल पद छोड़ना होगा।
2. स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा विधेयक 2025
इस कानून से न्यायपालिका पर किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव हटेगा।
तेज न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित होगी, ताकि कोई भी बड़ा पदाधिकारी कानूनी प्रक्रिया से बच न सके।
न्यायिक फैसले पूरी तरह स्वायत्त होंगे और कार्यवाही में पारदर्शिता रहेगी।
3. नैतिक राजनीति संहिता अधिनियम 2025
सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों तथा उनके नेताओं के लिए सख्त आचार संहिता तय की जाएगी।
शिकायत मिलने पर 72 घंटे में जांच शुरू होना अनिवार्य है।
राजनीतिक मूल्यों, जवाबदेही और सार्वजनिक जीवन में शुचिता को बढ़ावा दिया जाएगा।

संसद में ताजा हालात और आगे की प्रक्रिया
इन कानूनों का विपक्षी पार्टियों ने तीखा विरोध किया है। विपक्ष ने चिंता जताई कि इन प्रावधानों से जांच एजेंसियों का राजनीतिक दुरुपयोग होकर दुर्भावना से चुनी हुई सरकारों को हटाया जा सकता है। इस मुद्दे पर संसद में जोरदार हंगामा हुआ।
चर्चा के बाद सरकार ने इन तीनों बिलों को संयुक्त समिति के पास भेज दिया है, जहां सांसद और विशेषज्ञ इनकी बारीकी से समीक्षा करेंगे। समिति की रिपोर्ट के बाद इन कानूनों के विधिवत लागू होने का रास्ता साफ होगा। सरकार का कहना है कि इन कानूनों से भ्रष्टाचार और अपराध पालने वाले पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी और लोकतंत्र मजबूत होगा
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