
Bhilai : रिसाली नगर निगम में प्रशासनिक टकराव, आयुक्त पर गंभीर आरोप
नगर निगम रिसाली में इन दिनों बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। महापौर शशि सिन्हा और महापौर परिषद (एमआईसी) के सदस्यों ने निगम आयुक्त मोनिका वर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को लिखित शिकायत सौंपी है।
नगरीय प्रशासन विभाग को सौंपे चार आवेदन
महापौर परिषद की ओर से चार अलग-अलग आवेदन 22 जनवरी 2026 को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में विभागीय सचिव और डायरेक्टर के नाम सौंपे गए। प्रतिनिधिमंडल में महापौर शशि सिन्हा के साथ एमआईसी सदस्य जाहिर अब्बास, अनिल देशमुख, संजू नेताम, रोहित धनकर, ममता यादव, जमुना ठाकुर और रंजिता बेनुआ शामिल थे।
बिना बजट खर्च को बताया अवैध
पहले आवेदन में परिषद ने आरोप लगाया कि निगम आयुक्त ने छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 97 के तहत 30 नवंबर तक बजट अनुमान प्रस्तुत नहीं किया। परिषद का कहना है कि बिना स्वीकृत बजट के 1 दिसंबर के बाद किया गया समस्त खर्च अवैध और शून्य है। इसे वित्तीय कदाचार बताते हुए 48 घंटे में आयुक्त को हटाने या निलंबित करने की मांग की गई है।
जल शोधन संयंत्र में लापरवाही का आरोप
दूसरे आवेदन में मोरिद जलाशय स्थित 6 एमएलडी जल शोधन संयंत्र को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। परिषद के अनुसार तीन वर्षों से केमिकल हाउस जली हालत में बंद है और आधुनिक PLC/SCADA सिस्टम भी खराब पड़ा है। इसके बावजूद मैन्युअल डोजिंग से पानी की सप्लाई की जा रही है, जो जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बताया गया है। मामले की जांच ईओडब्ल्यू से कराने की मांग की गई है।
प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी को नहीं सौंपा कार्यभार
तीसरे आवेदन में आरोप लगाया गया कि शासन द्वारा नियुक्त प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी को कार्यभार नहीं दिया गया। इसके स्थान पर नियमों के विरुद्ध एक स्वच्छता पर्यवेक्षक को प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी और सलाहकार समिति का सचिव बनाया गया, जिसे अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन बताया गया है।
टेंडर नियमों में मनमाना संशोधन
चौथे आवेदन में कहा गया कि मेयर-इन-कौंसिल की अनुमति के बिना टेंडर नियमों में बदलाव किया गया। परिषद के अनुसार टेंडर क्रमांक 184068 दिनांक 1 जनवरी 2026 में शर्त क्रमांक 7 और 8 में बिना स्वीकृति संशोधन किया गया, जो पारदर्शिता और समान अवसर के खिलाफ है।
आंदोलन की चेतावनी
प्रभारी महापौर और जल-सामान्य प्रशासन विभाग के चेयरमैन अनिल देशमुख ने कहा कि मोरिद जलाशय से 8 से 10 हजार लोग प्रभावित होते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो रिसाली में भी इंदौर जैसी स्थिति बन सकती है। मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन किया जाएगा।
आपत्ति के बाद टेंडर हटाया गया
आयुक्त मोनिका वर्मा ने स्वीकार किया कि टेंडर को लेकर आपत्ति आई थी, जिसके बाद उसे हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि टेंडर पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार ही जारी किया गया था, लेकिन एमआईसी की आपत्ति के बाद तत्काल कार्रवाई की गई।
ऑटोमैटिक सिस्टम में तकनीकी खराबी
आयुक्त ने बताया कि एमएलडी प्लांट का ऑटोमैटिक सिस्टम भिलाई नगर निगम के समय लगाए गए टेंडर के तहत था, जिसमें तकनीकी समस्या आ गई है। एजेंसी का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। फिलहाल मैन्युअल टेस्टिंग के बाद पानी की सप्लाई की जा रही है और सिस्टम दोबारा शुरू करने के लिए डायरेक्टरेट को पत्र भेजा गया है।
प्रभार देना आयुक्त का अधिकार : मोनिका वर्मा
प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी को कार्यभार नहीं देने के आरोप पर आयुक्त ने कहा कि प्रभार देना आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने दावा किया कि निगम में सभी कार्य नियमों के अनुसार किए जा रहे हैं और शिकायतों को गंभीर या सही मानना उचित नहीं है।
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