
राजिम पर्यटन स्थल: अध्यात्म का पवित्र संगम
छत्तीसगढ़ का राजिम, जिसे “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” कहा जाता है, पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक स्थल है। यहां स्थित राजीव लोचन मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और इसकी प्राचीन वास्तुकला और शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

मंदिर में अक्सर भक्तों और पर्यटकों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जाती है।मंदिर का भव्य गोपुरम और इसके आसपास का शांत माहौल इसे एक आदर्श स्थान बनाता है। पर्यटक मंदिर के दर्शन के साथ-साथ यहां की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का भी आनंद लेते हैं। मंदिर के पुजारी पंडित रमेश चंद्र जोशी जी का कहना है, “यहां आने वाले पर्यटक न केवल दर्शन करते हैं, बल्कि आध्यात्मिक शांति भी प्राप्त करते हैं।”
राजिम का कुलेश्वर महादेव मंदिर
राजिम का कुलेश्वर महादेव मंदिर पर्यटकों के लिए एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। यह मंदिर त्रिवेणी संगम—महानदी, पैरी, और सोंढूर नदियों के मिलन स्थल—के बीच एक छोटे से टापू पर स्थित है।

यह मंदिर में सैकड़ों पर्यटक और श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है।मंदिर तक पहुंचने के लिए बना पैदल पुल और संगम का मनोरम दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। पर्यटक सुनीता वर्मा ने कहा, “यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और मंदिर का शांत वातावरण अद्भुत है। यह एक यादगार अनुभव है।” मंदिर के आसपास संगम में स्नान करने का अवसर भी पर्यटकों को आकर्षित करता है।
राजिम का त्रिवेणी संगम
राजिम का त्रिवेणी संगम पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है, और यहां बना नया आधुनिक पुल इसे और भी खास बनाता है।

यह पुल महानदी, पैरी, और सोंढूर नदियों के संगम को जोड़ता है, जिससे पर्यटकों को संगम के मनोरम दृश्य का आनंद लेने में आसानी होती है। इस पुल पर कई पर्यटक सेल्फी लेते और दृश्यों का आनंद लेते नजर आते हैं।पुल की आधुनिक संरचना और संगम का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। स्थानीय गाइड रवि साहू ने बताया, “यह पुल न केवल आवागमन को आसान बनाता है, बल्कि संगम के सौंदर्य को निहारने का एक शानदार अवसर भी देता है।” पर्यटक यहां से राजिम के अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं।
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