
राजिम हिंसा मामलें का पहला CCTV फुटेज आया सामने
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के डुटकैया गांव में रविवार को पुराने विवाद ने हिंसक सांप्रदायिक रूप ले लिया। एक पुराने मंदिर तोड़फोड़ मामले से जुड़े आरोपी की जेल से रिहाई के बाद गांव में तनाव भड़क गया, जिसके चलते बड़ी भीड़ ने अल्पसंख्यक (मुस्लिम) समुदाय के घरों पर हमला कर दिया। आधा दर्जन से अधिक घरों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी हुई, जबकि वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने महिलाओं और बच्चों को बचाने के लिए कई घंटों तक ढाल बनकर खड़े रहना पड़ा।
हिंसा का ट्रिगर: पुराना मंदिर विवाद और सुबह की मारपीट
घटना का मूल कारण 2024 में छावेश्वर शिव मंदिर में कथित तोड़फोड़ का मामला है, जिसमें आरोपी आरिफ खान (नाबालिग होने के कारण जुवेनाइल होम भेजा गया था, बाद में बेल पर रिहा) शामिल था। आरिफ गांव से दूर रहा, लेकिन रिहाई के बाद वह दो साथियों के साथ गांव लौटा। रविवार सुबह आरिफ और उसके साथियों ने कथित तौर पर 4-6 ग्रामीणों पर लाठी-डंडों से हमला किया, क्योंकि वे मंदिर मामले में गवाह थे।

पुलिस ने आरिफ, सलीम और इमरान के खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज किए और गिरफ्तारी का वादा किया, लेकिन मध्यस्थता विफल रही। इसके बाद दोपहर से शाम तक सैकड़ों की भीड़ (डुटकैया और आसपास के गांवों से) लाठियां, ईंट-पत्थर और केरोसिन लेकर जुट गई।

हमले का क्रम: लूटपाट, आगजनी और पथराव
- भीड़ ने पहले अल्पसंख्यक समुदाय के 10 परिवारों के घरों को घेरा।
- परिवार घरों में बंद हो गए, लेकिन भीड़ ने वाहनों में आग लगाई (3-4 वाहन जलाए गए)।
- फिर घरों में घुसकर आधा दर्जन से अधिक घरों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की।
- हमलावरों ने पहले परिवारों को बंधक बनाया, घरों के कैमरे तोड़े, फिर लूट की और अंत में आग लगाई।
पुलिस पर पथराव हुआ, जिसमें कम से कम 7 पुलिसकर्मी घायल हुए (5 राजिम सरकारी अस्पताल में, 1 रायपुर में, एसपी को भी चोट)। अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग (कासिमुद्दीन कुरैशी, अनवर खान, अमजद खान आदि सहित महिलाएं जैसे शबाना बेगम, नजनीन बेगम) घायल हुए।
पुलिस की बहादुरी और नियंत्रण
पुलिस संख्या में कम थी (राजिम कुंभ मेले के कारण बल की कमी), लेकिन कई घंटों तक महिलाओं-बच्चों को बचाने के लिए ढाल बनी रही। शाम 9 बजे अतिरिक्त बल पहुंचा, बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। करीब 20 लोगों को बस में सुरक्षित जगह ले जाया गया। रात 12 बजे के आसपास स्थिति नियंत्रण में आई। गांव अब छावनी में तब्दील है, भारी पुलिस तैनात।
सीसीटीवी फुटेज ने बढ़ाई गंभीरता
घटना के सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं, जिसमें साफ दिख रहा है कि हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से परिवारों को बंधक बनाया, कैमरे तोड़े, लूटपाट की और फिर आग लगाई। फुटेज से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। पुलिस वीडियो के आधार पर असामाजिक तत्वों की पहचान कर रही है और सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है।
प्रभावित परिवारों की स्थिति
भय के माहौल में प्रभावित परिवार गांव छोड़कर बाहर शरण लेने को मजबूर हुए। गांव में तनावपूर्ण शांति है, लेकिन कोई नई हिंसा नहीं हुई। पुलिस ने स्थिति पर नजर रखी हुई है।
यह घटना ग्रामीण छत्तीसगढ़ में सांप्रदायिक सद्भाव और पुरानी रंजिशों के खतरों को उजागर करती है। प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
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