
Raipur : यश शर्मा हत्याकांड में चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा
रायपुर, 14 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बहुचर्चित यश शर्मा हत्याकांड में स्पेशल जज एट्रोसिटी कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस जघन्य अपराध के चारों आरोपियों—तुषार पाहुजा, यश खेमानी, चिराग पंजवानी और तुषार पंजवानी—को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। केवल तीन महीने में सुनवाई पूरी कर यह फैसला सुनाया गया, जिसमें 28 गवाहों के बयानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि
यश शर्मा (20 वर्ष) रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र के महावीर नगर का निवासी था। वह अपनी दादी के साथ रहता था और सिंधी समाज में पंडिताई का काम करता था। यश के पिता की मृत्यु हो चुकी थी, और उसकी मां अलग रहती थी। 13 अक्टूबर 2024 को यश के दोस्त यश खेमानी ने उसे फोन कर पार्टी के लिए बुलाया। इसके बाद यश खेमानी, तुषार पाहुजा, चिराग पंजवानी और तुषार पंजवानी ने उसे कार में बंधक बनाकर रिंग रोड के पास एक कैफे के बाहर ले गए। वहां उन चारों ने यश से उसके एक अन्य दोस्त तुषार तोलानी के बारे में पूछताछ की और जानकारी न देने पर उसकी बेरहमी से पिटाई की।

क्रूरता की हदें पार
पुलिस को दिए यश के बयान के अनुसार, आरोपियों ने उसे बांस के डंडे से मारा और गाली-गलौज की। रात 2 बजे मारपीट के बाद यश बेहोश हो गया। इसके बाद आरोपियों ने उसे मेकाहारा अस्पताल ले जाकर दर्द की दवाई ली और फिर VIP रोड स्थित शगुन फॉर्म के कमरा नंबर 107 में दो दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान भी उसकी पिटाई जारी रही। यश की चाची वंशिका शर्मा के अनुसार, आरोपियों ने उसे लात-घूसों से मारा और सिगरेट से उसकी कलाइयों को जलाया, जिससे फफोले पड़ गए।

हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती
मारपीट से यश की हालत बिगड़ने पर आरोपियों ने उसे चरोदा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से यश ने किसी तरह परिवार को फोन किया, लेकिन आरोपियों ने उसे धमकी दी कि वह घटना का जिक्र न करे। डर के कारण यश ने परिवार को एक्सीडेंट का बहाना बताया। बाद में उसे AIIMS ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसके सीने और पेट की आंतें फैल गई थीं, और मल-मूत्र की जगह में ब्लॉकेज के कारण इंफेक्शन हो गया था। तीन महीने तक इलाज के बाद यश की मृत्यु हो गई।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
यश के परिजनों ने 19 अक्टूबर 2024 को राजेंद्र नगर थाने में FIR दर्ज की। शुरुआत में पुलिस की कार्रवाई में देरी के कारण परिजनों ने हंगामा किया। दिसंबर 2024 में पुलिस ने तुषार पाहुजा को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया। इसके बाद विशेष पुलिस टीम ने 90 दिनों तक भटक रहे चिराग पंजवानी, तुषार पंजवानी और यश खेमानी को मध्य प्रदेश से रायपुर आते समय गिरफ्तार किया।
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
स्पेशल जज एट्रोसिटी कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से सुनवाई पूरी की। 28 गवाहों के बयानों और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को यश शर्मा के परिजनों और स्थानीय लोगों ने न्याय की जीत बताया।
गवाहों को धमकियों का साया
हालांकि, इस मामले में गवाहों को जेल में बंद आरोपियों द्वारा धमकियां देने की खबरें भी सामने आई थीं। गवाह खुशाल तोलानी और कमलेश बुलवानी ने पुलिस और कोर्ट में शिकायत दर्ज की थी कि तुषार पाहुजा और अन्य आरोपियों ने उन्हें फोन पर धमकाया और बयान बदलने का दबाव बनाया। इन शिकायतों के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और अतिरिक्त FIR दर्ज की गई।
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