
Raipur नगर निगम पर संपत्तिकर वसूली को लेकर उठे सवाल
रायपुर नगर निगम द्वारा संपत्तिकर वसूली में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। गलत क्षेत्रफल के आधार पर कर निर्धारण करने से हजारों लोगों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डाला जा रहा है। शिकायतों के बावजूद निगम का राजस्व विभाग उदासीन बना हुआ है।

गलत जीआईएस सर्वे बना परेशानी की जड़
- करीब 5 साल पहले नगर निगम ने वार्डों में जीआईएस सर्वे कराया था। इसी आधार पर आज तक संपत्तिकर का डिमांड नोट जारी हो रहा है। हालांकि सर्वे के दौरान बड़े पैमाने पर त्रुटियां हुई थीं।
- दो या तीन मंजिला मकानों में हर मंजिल का क्षेत्रफल एक समान मानकर जोडऩे से क्षेत्रफल वास्तविक से कहीं अधिक दिखाया गया।
- कई भवनों का क्षेत्रफल डबल या ट्रिपल दर्ज किया गया।
- कुछ मामलों में तो मकान गलत नाम पर दर्ज हो गए।
गलत वसूली से परेशान करदाता
- केस-1: चौरसिया कॉलोनी के कृष्णा होम्स निवासी एसआर साहू का प्लॉट 500 वर्गफीट का है, जिसमें भूतल और प्रथम मंजिल पर 450-450 वर्गफीट का निर्माण है। इसके बावजूद नगर निगम ने संपत्तिकर डिमांड नोट में 1800 वर्गफीट कवर एरिया दिखाया।
- केस-2: बैरन बाजार निवासी मोहम्मद सागीर के 1000 वर्गफीट मकान को निगम ने 2500 वर्गफीट दर्ज किया। वे एक साल से लगातार ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन सुधार नहीं हुआ।
- लोगों का कहना है कि गलती निगम विभाग की है, लेकिन भुगतना उन्हें पड़ रहा है। वार्ड पार्षदों तक शिकायत पहुंचाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

मंत्री ने दिलाया आश्वासन
प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा है कि संपत्तिकर से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निराकरण कराया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि नागरिकों को किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए नगर निगम अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे।
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