
रायपुर में ट्रैफिक पुलिस की मनमानी: इमरजेंसी ड्यूटी पर जा रहे युवक के साथ मारपीट, बाइक जंजीर से बांधी
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ट्रैफिक पुलिस की दबंगई का एक और मामला सामने आया है। पचपेड़ी नाका अंडरब्रिज के पास यातायात थाने के बाहर एक युवक के साथ ट्रैफिक पुलिस द्वारा मारपीट और उसकी बाइक को जंजीर से बांधने की घटना ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद जनता में ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। लोग इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इमरजेंसी ड्यूटी पर जा रहे युवक को रोका
घटना बुधवार, 23 जुलाई 2025 की दोपहर की है, जब रायपुर के बसंत विहार निवासी तारकेश्वर जंघेल अपनी बाइक से पचपेड़ी नाका अंडरब्रिज से गुजर रहे थे। तारकेश्वर ने बताया कि वह वी वाय हॉस्पिटल में इमरजेंसी ड्यूटी के लिए जा रहे थे। इस दौरान एक ट्रैफिक आरक्षक ने उन्हें रोक लिया और वाहन के दस्तावेज, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन (RC), मांगने शुरू किए। युवक ने पुलिसकर्मी को अपनी इमरजेंसी ड्यूटी की जानकारी दी और बताया कि उनके पास सभी दस्तावेज घर पर हैं, लेकिन तत्काल कोई उन्हें दस्तावेजों की फोटो नहीं भेज पा रहा था।
ट्रैफिक पुलिस ने की धक्का-मुक्की
युवक की बात को अनसुना करते हुए ट्रैफिक आरक्षक ने उनकी बाइक को जबरन यातायात चौकी के सामने रोक लिया और लोहे की जंजीर से बांध दिया। जब तारकेश्वर ने इसका विरोध किया और इमरजेंसी ड्यूटी की बात दोहराई, तो ट्रैफिक आरक्षक ने उनके साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। इस दौरान कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

वायरल वीडियो ने उजागर की सच्चाई
इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें ट्रैफिक आरक्षक की दबंगई साफ नजर आ रही है। वीडियो में युवक अपनी स्थिति समझाने की कोशिश करता दिख रहा है, लेकिन ट्रैफिक पुलिसकर्मी उसकी बात को नजरअंदाज कर रहा है और बाद में उसके साथ मारपीट करता दिखाई दे रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने ट्रैफिक पुलिस की कड़ी आलोचना शुरू कर दी है। कई यूजर्स ने लिखा, “इमरजेंसी में भी पुलिस का यह रवैया शर्मनाक है। आम जनता की सुरक्षा का जिम्मा ऐसी पुलिस के हाथों में कैसे सुरक्षित है?”
पीड़ित युवक ने दर्ज कराई शिकायत
पीड़ित तारकेश्वर जंघेल ने बताया कि इस घटना से उन्हें मानसिक आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा, “मैंने ट्रैफिक आरक्षक को बार-बार बताया कि मैं इमरजेंसी ड्यूटी पर जा रहा हूं, लेकिन उन्होंने न तो मेरी बात सुनी और न ही दस्तावेजों की जांच की। इसके बजाय मेरे साथ बदतमीजी की और गाड़ी को जंजीर से बांध दिया। यह बेहद अपमानजनक था।” तारकेश्वर ने इस मामले में उच्च अधिकारियों से शिकायत करने का फैसला किया है।

पुलिस विभाग में जांच शुरू
इस मामले में अभी तक ट्रैफिक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वायरल वीडियो की जांच कर रहे हैं। संबंधित ट्रैफिक आरक्षक की पहचान की जा रही है और उससे पूछताछ शुरू हो गई है। विभागीय स्तर पर प्रारंभिक जांच शुरू हो चुकी है, और जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की संभावना है।
ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
यह घटना एक बार फिर ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। कई बार आम नागरिकों के साथ इस तरह के व्यवहार की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया धीमी होने के कारण जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ट्रैफिक पुलिस का काम केवल चालान काटना और सख्ती दिखाना है, या जनता की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी इसका हिस्सा है?
इस घटना ने प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ट्रैफिक पुलिस को आम जनता के साथ व्यवहार में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। जनता अब इस मामले में कठोर कार्रवाई की उम्मीद कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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