
रायपुर में Rain Water Harvesting न लगाने वालों पर निगम सख्त, FDR राशि होगी राजसात
शहर में गिरते भूजल स्तर और बढ़ते जल संकट को देखते हुए नगर निगम ने अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग (RWH) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगम ने उन भवन मालिकों पर कार्रवाई शुरू कर दी है जिन्होंने नक्शा पास कराते समय एफडीआर जमा कराई थी, लेकिन तय समय पर सिस्टम नहीं लगाया।

एफडीआर राशि हुई राजसात
2012 से 2015 के बीच कई भवन स्वामियों ने नक्शा पास कराते समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने की शर्त पर एफडीआर के रूप में सुरक्षा राशि निगम में जमा की थी। नियमों के मुताबिक, सिस्टम लगाकर प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद ही यह राशि वापस मिलती है।
जोन-7 के वार्ड 62 में लगभग 62 भवन मालिकों ने न तो सिस्टम लगाया और न ही एफडीआर वापसी के लिए आवेदन किया। इसके बाद नगर निगम ने 20 करोड़ रुपये से अधिक की एफडीआर राशि राजसात (जब्त) करने का आदेश जारी कर दिया।
निगम खुद लगाएगा सिस्टम
निगम अधिकारियों ने बताया कि जब्त की गई धनराशि से अब निगम स्वयं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भवनों में स्थापित कराएगा। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि नियमों का पालन भी हो और भूजल संरक्षण में योगदान भी मिले।
सभी भवन मालिकों से अपील
नगर निगम ने शहर के सभी भवन मालिकों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएँ। इससे उन्हें एफडीआर राशि वापस मिल सकेगी और साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण में भी भागीदार बनेंगे। निगम ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
- विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। ऐसे में वर्षा जल संरक्षण बेहद जरूरी है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग न केवल भूजल को रिचार्ज करता है, बल्कि शहर के भविष्य को जल संकट से बचाने में भी मददगार साबित होगा।
- रायपुर नगर निगम का यह फैसला साफ करता है कि वह जल संरक्षण नीति को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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