
Raipur में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे से 58 लाख की धोखाधड़ी, बैंक अधिकारियों पर FIR
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक चौंकाने वाला धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल के बैंक खाते से 58 लाख रुपये से अधिक की राशि बिना उनकी अनुमति के दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दी गई। इस मामले में आजाद चौक थाने में फेडरल बैंक के अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इसे साइबर फ्रॉड या बैंक कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत के दृष्टिकोण से जांच कर रही है।

कैसे हुआ धोखाधड़ी का यह मामला?
रायपुर के स्वर्ण भूमि, मोवा क्षेत्र में रहने वाले नितिन अग्रवाल एक रियल एस्टेट व्यवसायी हैं। उनकी शिकायत के अनुसार, उनका खाता फेडरल बैंक की जीई रोड शाखा में है। 8 सितंबर 2025 को उनके खाते से बिना उनकी जानकारी या सहमति के तीन अलग-अलग लेनदेन में कुल 58 लाख 5 हजार रुपये निकाले गए। इनमें 29 लाख, 18 लाख 5 हजार और 11 लाख रुपये की राशि दो अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई। नितिन का दावा है कि इन लेनदेन के लिए उनसे कोई अनुमति नहीं ली गई।

पुलिस ने दर्ज की FIR
धोखाधड़ी की सूचना मिलते ही नितिन ने आजाद चौक पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने फेडरल बैंक के अधिकारियों के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संदिग्ध खातों की जानकारी जुटाने के लिए बैंक से संपर्क किया है।
साइबर फ्रॉड या अंदरूनी साजिश?
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बैंक अधिकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से एक लेटरहेड पर ट्रांसफर के निर्देश प्राप्त हुए थे। हालांकि, यह लेटरहेड जाली हो सकता है, और इसकी प्रामाणिकता की जांच की जा रही है। पुलिस को शक है कि यह साइबर अपराधियों की करतूत हो सकती है, जिसमें बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है। जांच में साइबर सेल की मदद ली जा रही है ताकि ट्रांजैक्शन के डिजिटल निशान और संदिग्ध खातों का पता लगाया जा सके।
रायपुर में हड़कंप, उठे सवाल
इस घटना ने रायपुर के व्यापारिक और सामाजिक हलकों में सनसनी मचा दी है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे के साथ हुई इस धोखाधड़ी ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि इतनी बड़ी राशि बिना खाताधारक की अनुमति के कैसे ट्रांसफर हो सकती है। इस मामले ने साइबर सुरक्षा और बैंकिंग प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की जरूरत को और रेखांकित किया है।
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