
Raipur: दो साल पुराने परिवारिक हत्या मामले में आरोपी को उम्रकैद की सजा
रायपुर। राजधानी रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र में स्थित सफायर ग्रीन फेज-2 कॉलोनी में 25 फरवरी 2024 को हुई भाई की दर्दनाक हत्या के मामले में आज अदालत ने फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश सुबोध मिश्रा की अदालत ने आरोपी पीयूष झा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक बसंत गोड ने की।
घटना की पूरी कहानी
पुलिस के अनुसार, आरोपी पीयूष झा और मृतक उनका छोटा भाई पराग झा एक ड्रोन बनाने वाली कंपनी के सह-मालिक थे। दोनों भाइयों का स्टार्टअप काफी सफल था और मात्र दो साल में 45 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी से 3.50 करोड़ रुपये का कारोबार तक पहुंच गया था। पीयूष झा एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के पढ़े-लिखे थे और एक निजी यूनिवर्सिटी से डिग्री प्राप्त की थी। हालांकि, उनकी निजी जिंदगी में परेशानियां थीं। सगाई टूटने के बाद वे शराब की लत में पड़ गए थे, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा था।

हत्या की रात घर में छोटे-मोटे विवाद हुआ। सूत्रों के मुताबिक, छोटे भाई पराग ने बड़े भाई पीयूष पर हाथ उठाया। शराब के नशे में पीयूष तैश में आ गए और कबर्ड में रखी लाइसेंसी पिस्टल निकाल ली। उन्होंने तीन गोलियां चलाईं, जिनमें से एक सीधे पराग के सिर में लगी। पराग वहीं गिर पड़े और फर्श पर खून फैल गया।
मां को वीडियो कॉल कर दी हत्या की जानकारी
घटना के तुरंत बाद पीयूष ने अपनी मां को वीडियो कॉल किया और हत्या की बात कबूल कर ली। मां को पहले लगा कि बेटा मजाक कर रहा है, लेकिन स्थिति की गंभीरता समझते ही उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने फौरन नाकाबंदी की और डीडीनगर क्षेत्र से पीयूष को गिरफ्तार कर लिया। घटनास्थल से पिस्टल और गोलियां बरामद की गईं।
पूछताछ में पीयूष ने कबूला कि शराब पीकर घर लौटा था। पराग ने ताने मारे और हाथ उठाया, जिससे गुस्सा भड़क उठा। गोली चलाते ही उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उस रात वे पिस्टल और मोबाइल लेकर कार से भागने की कोशिश भी कर रहे थे। घटना के समय घर में कोई और मौजूद नहीं था।
अदालत में मुख्य सबूत बने मां का बयान और वीडियो कॉल
मुकदमे के दौरान मां का बयान और वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग मुख्य सबूत के रूप में प्रस्तुत किए गए। न्यायाधीश सुबोध मिश्रा ने सभी गवाहों और साक्ष्यों की गहन जांच के बाद पीयूष को दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि परिवारिक विवाद या मानसिक तनाव किसी को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं देता। इस नृशंस हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था।
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