
Raipur में मेडिकल इक्विपमेंट घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई
शशांक चोपड़ा को 4 दिन की हिरासत में लिया गया
रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़ी दवा और मेडिकल उपकरण (रीएजेंट) खरीदी में कथित घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। करीब 660 करोड़ रुपये की बहुचर्चित खरीदी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद ईडी सक्रिय हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, दुर्ग स्थित मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा से रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी ने छह कारोबारियों और सहयोगियों को जांच के घेरे में ले लिया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रायपुर जोनल ऑफिस ने मेडिकल इक्विपमेंट और री-एजेंट खरीद घोटाले के सिलसिले में मेसर्स मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 14 जनवरी 2026 को की गई।
कोर्ट ने दी 4 दिन की रिमांड
गिरफ्तारी के अगले दिन 15 जनवरी 2026 को शशांक चोपड़ा को माननीय स्पेशल कोर्ट (PMLA), रायपुर के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट ने ED को पूछताछ के लिए 4 दिनों की कस्टडी प्रदान की है, जो 19 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगी।

घोटाले का खुलासा: टेंडर में हेरफेर और भारी नुकसान
ED ने यह कार्रवाई ACB/EOW, रायपुर द्वारा दर्ज FIR और चार्जशीट के आधार पर की है। आरोप है कि शशांक चोपड़ा ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) और डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DHS) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने मांग को गलत तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर बताया और CGMSCL को अत्यधिक ऊंची कीमतों पर मेडिकल उपकरण एवं री-एजेंट सप्लाई किए। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ और आरोपी व उसके साथियों को अवैध लाभ प्राप्त हुआ।
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