
Raipur: 1092 दिन बाद दर्ज हुआ अपराध, 11 दिन में ही पुलिस ने कहा—‘घटना ही नहीं हुई’
सीसीटीवी फुटेज, गवाहों और अधिकारियों की जांच के बाद भी जांच पर उठे सवाल
रायपुर। राजधानी रायपुर से पुलिस जांच प्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। 1092 दिनों तक सीसीटीवी फुटेज खंगालने, विधिवत पंचनामा तैयार करने, 7 प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और आरोपियों के बयान लेने तथा थाना प्रभारी से लेकर सीएसपी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर तक गहन जांच के बाद पुलिस ने एक अपराध दर्ज किया, लेकिन महज 11 दिन के भीतर ही पलटी मारते हुए यह कह दिया कि—“घटना ही नहीं हुई।”

लंबी जांच के बाद दर्ज हुआ था अपराध
सूत्रों के अनुसार, मामले में पुलिस ने करीब तीन वर्षों तक सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन किया। इसके साथ ही फुटेज का विधिवत पंचनामा तैयार किया गया। जांच के दौरान 7 प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान लिए गए, वहीं आरोपियों से भी पूछताछ की गई, जिसमें घटना होना, देखना या उसमें शामिल होना स्वीकार किया गया।
उच्च अधिकारियों तक हुई थी जांच
इस प्रकरण की जांच केवल थाना स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि थाना प्रभारी, जांच अधिकारी, सीएसपी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी मामले की गहन पड़ताल की गई। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद पुलिस ने अपराध दर्ज किया था।
11 दिन में ही बदला रुख
हैरानी की बात यह है कि अपराध दर्ज करने के मात्र 11 दिन बाद ही पुलिस ने अपना रुख बदलते हुए कहा कि संबंधित घटना हुई ही नहीं। इस अचानक बदले गए निष्कर्ष ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।
दबाव में कार्रवाई का आरोप
मामले को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि किसी दबाव के चलते पुलिस ने पहले दर्ज किए गए अपराध से पीछे हटते हुए क्लोजर रिपोर्ट की दिशा में कदम बढ़ाया। इससे न केवल पीड़ित पक्ष बल्कि आम जनता के बीच भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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