
रायपुर: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार की पोल खुली, 7 करोड़ का Auditorium जर्जर
रायपुर, 12 जुलाई 2025: राजधानी रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा 7 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ऑडिटोरियम उद्घाटन से पहले ही जर्जर हालत में पहुंच गया है। इस मामले को लेकर देर रात रूसा और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त जांच टीम ने विश्वविद्यालय परिसर में अचानक छापेमारी की और निर्माण कार्य में अनियमितताओं की पुष्टि की। जांच टीम ने ऑडिटोरियम की मरम्मत के लिए 1 महीने का अल्टिमेटम जारी किया है।
जर्जर ऑडिटोरियम और भ्रष्टाचार के आरोप
काठाडीह स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में बना यह ऑडिटोरियम 7 करोड़ रुपये की लागत से रूसा और पीडब्ल्यूडी के सहयोग से बनाया गया था। हालांकि, इसका उद्घाटन भी नहीं हुआ है और भवन की दीवारों में दरारें, बीम में कमजोरी और इंटीरियर डिजाइन के हिस्सों के गिरने की शिकायतें सामने आई हैं। विश्वविद्यालय परिसर में बबूल, बेर और कांटेदार झाड़ियों के बीच यह भवन खंडहर जैसा दिखाई दे रहा है, जो निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करता है।

जांच टीम की छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए रूसा और पीडब्ल्यूडी की एक संयुक्त जांच टीम ने देर रात विश्वविद्यालय परिसर में छापेमारी की। टीम ने ऑडिटोरियम का निरीक्षण किया और पाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया। दीवारों और बीम में दरारें, अधूरा निर्माण और खराब इंटीरियर डिजाइन इस बात का सबूत हैं कि करोड़ों रुपये की राशि का दुरुपयोग हुआ है। जांच टीम ने विश्वविद्यालय प्रशासन, रूसा और पीडब्ल्यूडी को ऑडिटोरियम की मरम्मत के लिए 1 महीने का समय दिया है और चेतावनी दी है कि तय समय में काम पूरा न होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सवालों के घेरे में विश्वविद्यालय और पीडब्ल्यूडी
इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर 7 करोड़ रुपये की लागत से बना ऑडिटोरियम उद्घाटन से पहले ही जर्जर कैसे हो गया? निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही भ्रष्टाचार की जांच क्यों नहीं की गई? विश्वविद्यालय प्रबंधन, रूसा और पीडब्ल्यूडी पिछले सात सालों से इस मामले पर चुप्पी क्यों साधे रहे? मरम्मत के लिए राशि मांगने के बजाय जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? ये सवाल स्थानीय लोगों और विश्वविद्यालय के छात्रों में आक्रोश पैदा कर रहे हैं।
छात्रों और स्थानीय लोगों में आक्रोश
विश्वविद्यालय के छात्रों और स्थानीय लोगों ने इस मामले की कड़ी निंदा की है। एक छात्र, रोहित साहू ने कहा, “यह शर्मनाक है कि करोड़ों रुपये की लागत से बना ऑडिटोरियम खंडहर में तब्दील हो रहा है। यह जनता के पैसों की बर्बादी है। जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।” स्थानीय निवासियों ने भी मांग की है कि इस भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए।
प्रशासन का मौन और आगे की कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रबंधन इस मामले पर अब तक मौन साधे हुए है, जिससे सवाल और गहरा रहे हैं। रूसा और पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत के लिए अल्टिमेटम तो जारी किया है, लेकिन भ्रष्टाचार के दोषियों पर कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया है। इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया है, जहां लोग इसे “भ्रष्टाचार की इमारत” करार दे रहे हैं।
जनता से अपील
जांच टीम ने जनता और छात्रों से अपील की है कि वे इस मामले से संबंधित किसी भी जानकारी को साझा करें, ताकि भ्रष्टाचार के जिम्मेदार लोगों को बेनकाब किया जा सके। साथ ही, प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि ऑडिटोरियम की मरम्मत जल्द शुरू की जाएगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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