
Raipur : खरसिया-नवा रायपुर-परमलकसा Railway परियोजना का बड़ा आदेश
रायपुर जिले के 34 गांवों की जमीन पर अब खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। यह निर्णय खरसिया-नवा रायपुर-परमलकसा रेलवे परियोजना के तहत लिया गया है, जो क्षेत्र में 5वीं और 6वीं रेलवे लाइन के निर्माण से जुड़ी है। इस परियोजना के तहत 278 किलोमीटर लंबी नई लाइन बिछाई जाएगी और 34 गांवों की जमीन इस निर्माण कार्य में शामिल होगी। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रस्ताव पर जमीन के खरीदी-बिक्री और हस्तांतरण पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है जिससे परियोजना का काम बिना अवरोध पूरा किया जा सके.

रोक लगाने का कारण और विवरण
पहले से जारी रोक में संशोधन कर कलेक्टर ने साफ किया है कि जब तक परियोजना पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री या किसी भी तरह का हस्तांतरण नहीं हो सकेगा। प्रशासन ने जनता को भी अपील की है कि वे इस दौरान जमीन की खरीद-फरोख्त से बचें, अन्यथा ऐसी खरीदी अमान्य मानी जाएगी। परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र की यातायात सुविधा में सुधार होगा और माल ढुलाई का कार्य भी सुगम होगा।
खरसिया-नवा रायपुर-परमलकसा रेलवे लाइन का महत्व
- कुल मार्ग की लंबाई 278 किलोमीटर है, जिसपर 615 किलोमीटर ट्रैक बिछाया जाएगा।
- परियोजना पर करीब 8741 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- 21 नए रेलवे स्टेशन बनेंगे, जिनसे लगभग 47.25 लाख लोगों का रेलवे नेटवर्क से जुड़ाव होगा।
- यह लाइन रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदा बाजार, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव आदि जिलों को सीधा जोड़ती है।
- 48 बड़े पुल, 349 छोटे पुल, 14 आरओबी, 184 आरयूबी और 5 रेलवे फ्लाईओवर बनाए जाएंगे।
- परियोजना से सालाना लगभग 22 करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी और 113 करोड़ किग्रा CO2 उत्सर्जन कम होगा, जो लगभग 4.5 करोड़ पेड़ों के बराबर है।

परियोजना का लाभ
यह परियोजना छत्तीसगढ़ में लॉजिस्टिक लागत को कम करने और नए उद्योगों व सीमेंट संयंत्रों के विकास में भी मदद करेगी। यह रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाकर औद्योगिक और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगी।
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