
Raipur जमीन खरीदी-बिक्री पर लगी रोक, हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई थी
रायपुर, 20 सितंबर 2025, सुबह 8:33 बजे |छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार ने रायपुर से पमालकोसा रेलवे परियोजना के अंतर्गत प्रभावित 278 किलोमीटर लंबी 5 वीं और 6 वीं रेलवे लाइन के निम्नन क्षेत्रों में जमीन के हस्तांतरण पर रोक लगा दी है। इस निर्णय के पीछे का उद्देश्य रेलवे के मध्य प्रभावशाली अधिग्रहण (निम्नन) के प्रस्ताव को प्रभावी ढंग से लागू करना और संशोधन कार्य को सुचारू रूप से अंजाम देना है।

जमीन पर निम्नन थाना हस्तांतरण पर रोक लगाने के इस कदम से 34 ग्रामों की भूमि पर नया प्रभाव पड़ेगा। कलेक्टर डॉ. गिरीश सिहं ने इस 34 ग्रामों की भूमि पर निषेधाज्ञा जारी कर दी है, जिसके तहत अब तक कोई भी जमीन की खरीद-फरोख्त या हस्तांतरण की कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। यह निर्णय रेलवे परियोजना के सुचारू संचालन और क्षेत्रीय विकास को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
प्रभावित क्षेत्र
इस निषेधाज्ञा के तहत प्रभावित क्षेत्रों में अंबनपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले कई गांव शामिल हैं। इनमें गिरोला (बेलदिह), बेलभाटा, उरला, बकतरा, अंबनपुर, सारंगढ़, कोलार, खोरीपारा, पलोद, तोतरा, रवतटी, सर्सदा तatha गोबरा नवापारा तहसील के अंतर्गत ग्राम वरवरहट, नवागांव, तारी, ठंडई, जमगांव तथा खोरी तहसील के अंतर्गत खड़िया, ग्राम अल्लेसुर, पचरी, पथरकुंडी, नहरबिंद व खोरा, माता, बेलदारसिवनी, बुदनी तatha तहसील मंदिर हसौद के ग्राम बोलली, टिकारी, विशहरी, नारा, रीवा, गुजर्रा, धमनी, गणौद जैसे गांवों को शामिल किया गया है।
विशेष प्रावधान
निषेधाज्ञा के तहत इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर पूर्ण रूप से रोक लगाई गई है। इसके साथ ही, प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि 150 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि, जैसे मकान बनाना, दुकान खोलना, या अन्य विकास कार्य, नमकतारन, बांटवारा, दियवर्सन, निम्नन कार्य व अन्य लंबार्ड गतिविधियों पर भी अंकुश लगाया गया है। यह कदम रेलवे परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को सुगम बनाने और स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा करने के लिए उठाया गया है।

प्रशासनिक कार्रवाई
कलेक्टर डॉ. गिरीश सिहं के निर्देशानुसार, इस निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे इस निर्णय का पालन करें और किसी भी प्रकार की कानूनी जटिलता से बचें। इसके अलावा, रेलवे परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विशेष टीमों का गठन भी किया गया है, जो इस क्षेत्र में निगरानी रखेंगी।
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