
Raipur कोर्ट का सख्त फैसला: हत्या के मामले में 21 वर्षीय युवक को 10 वर्ष की सश्रम कारावास
रायपुर, 26 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने एक हत्या के गंभीर मामले में अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। न्यायाधीश जिनेंद्र कुमार टोंडरे की अदालत ने 21 वर्षीय धर्मेंद्र चंद्रवंशी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, साथ ही 1,000 रुपये के जुर्माने का आदेश दिया। सजा के तुरंत बाद अदालत ने जेल वारंट जारी कर दिया, जिसके तहत अभियुक्त को केंद्रीय जेल रायपुर भेजा जाएगा। यह फैसला 25 सितंबर 2025 को सुनाया गया, जो राज्य में कानूनी प्रक्रिया की गति और न्याय की दक्षता का प्रतीक है।

यह मामला हिरासत में मौतों और पुलिस कार्रवाइयों के बीच आया है, जहां अदालत ने पर्याप्त सबूतों के आधार पर अभियोजन पक्ष को मजबूत माना। फैसले से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिला है, बल्कि अपराधियों के लिए एक चेतावनी भी बनी है।
मामला का विवरण: चोरी से जुड़े विवाद में हत्या
अभियुक्त धर्मेंद्र चंद्रवंशी पिता जबर सिंह, उम्र 21 वर्ष, मूल रूप से टेटलापारा थाना इंद्रावती जिला गरियाबंद के निवासी हैं। उनका हालिया ठिकाना रायल पोल्ट्री फार्म, धनी मोड़ थाना मुजगहन जिला रायपुर बताया गया है। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304(भ) (गंभीर चोट पहुंचाने के इरादे से हत्या), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 34 (साझा इरादे से अपराध) के तहत मामला दर्ज किया था।
अदालत में चले मुकदमे के अनुसार, घटना एक चोरी के विवाद से जुड़ी थी, जिसमें अभियुक्त ने कथित तौर पर पीड़ित को गंभीर चोटें पहुंचाईं, जिसके परिणामस्वरूप मौत हो गई। अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष मजबूती से रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियुक्त के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण पाए, जिसके फलस्वरूप उसे दोषी करार दिया गया।
सजा का ब्योरा: 10 वर्ष कारावास और जुर्माना
फैसले में न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त को धारा 304(भ) के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, 1,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। यदि अभियुक्त जुर्माना अदा करने में असमर्थ रहता है, तो उसे अतिरिक्त एक माह का कारावास काटना पड़ेगा। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सजा की अवधि 25 सितंबर 2025 से गिनी जाएगी।
अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि अभियुक्त को उचित श्रेणी की जेल में रखा जाए और कैदी के सभी कानूनी अधिकारों—जैसे चिकित्सा सुविधा, मुलाकात और कानूनी सहायता—का पूर्ण पालन किया जाए। जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल रायपुर को अभियुक्त को सुरक्षित रूप से हिरासत में लेने और वारंट के अनुसार सजा कराने का आदेश दिया गया है। वारंट पर द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रायपुर (छ.ग.) की विधिवत मुहर और हस्ताक्षर हैं, जो इसे पूर्णतः वैध बनाते हैं।
जेल वारंट और कार्यान्वयन: तत्काल कार्रवाई
फैसले के तुरंत बाद अदालत ने जेल वारंट जारी कर दिया, जिसकी प्रति जेल अधीक्षक को सौंप दी गई। निर्देशों के अनुसार, अभियुक्त को तत्काल हिरासत में लेकर रायपुर की केंद्रीय जेल पहुंचाया जाएगा। यह प्रक्रिया राज्य की न्यायिक व्यवस्था की त्वरितता को दर्शाती है, जहां सजा सुनाने के बाद कार्यान्वयन में कोई देरी नहीं की जाती।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आईपीसी की धारा 304(भ) के तहत सजाओं को मजबूत करने का उदाहरण है, जो गैर-इरादतन हत्या के मामलों में कठोरता बरतने का संदेश देता है।
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