
Raipur कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की बड़ी कार्रवाई: आईपी क्लब समेत सात बार, क्लब, पब, रेस्टोरेंट के लाइसेंस किए रद्द
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शराब परोसने के लाइसेंस धारकों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के नेतृत्व में एक विशेष अभियान के तहत आईपी क्लब सहित सात प्रमुख बार, क्लब, पब और रेस्टोरेंट के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई अवैध शराब परोसने, नियमों का उल्लंघन और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोपों पर आधारित है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम शहर में शराब संस्कृति पर लगाम लगाने और युवाओं को नशे से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

अवैध गतिविधियों का पर्दाफाश: आईपी क्लब पर विशेष नजर
नवा रायपुर क्षेत्र में स्थित आईपी क्लब लंबे समय से विवादों में घिरा रहा है। आबकारी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, यह क्लब लाइसेंस रद्द होने के बावजूद देर रात तक शराब परोसने का केंद्र बना हुआ था। 2022 से ही इस क्लब पर अवैध संचालन के आरोप लगे थे, जहां युवक-युवतियां अत्यधिक शराब सेवन कर मारपीट और गोलीबारी जैसी घटनाओं में लिप्त पाए गए। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने बताया, “आईपी क्लब का लाइसेंस FL-IV श्रेणी के तहत अस्थायी था, लेकिन इसका दुरुपयोग हो रहा था। हमने सख्ती से इसे रद्द किया है ताकि ऐसी जगहें युवाओं के लिए खतरा न बनें।” क्लब प्रबंधन पर जुर्माना लगाने के साथ ही आगे की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

सात प्रतिष्ठानों पर छापेमारी: नियम तोड़ने की मिली सजा
अभियान के दौरान रायपुर के विभिन्न इलाकों में सात प्रतिष्ठानों का चयन किया गया, जिनमें चार बार, दो क्लब और एक पब शामिल हैं। इनमें से अधिकांश पर शराब की बिक्री के लिए निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन, बिना लाइसेंस के अतिरिक्त सेवाएं प्रदान करना और असुरक्षित वातावरण बनाने के आरोप साबित हुए। कलेक्टर ने कहा, “ये प्रतिष्ठान न केवल आबकारी नियमों का पालन नहीं कर रहे थे, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था को भी चुनौती दे रहे थे।” रद्द लाइसेंस वाले स्थानों को तत्काल बंद करने के आदेश दिए गए हैं, और दोषी मालिकों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
कलेक्टर गौरव सिंह की सख्ती: नक्सल क्षेत्र से राजधानी तक का सफर
डॉ. गौरव सिंह, जो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी हैं, छत्तीसगढ़ कैडर के 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने रायगढ़ में सहायक कलेक्टर, सरायपाली में एसडीएम और नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में जिला पंचायत सीईओ के रूप में उत्कृष्ट कार्य किया। जनवरी 2024 में रायपुर कलेक्टर बनने के बाद से वे भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में कॉलेज भूमि घोटाले में उनकी शिकायत राष्ट्रपति और सीबीआई तक पहुंची, जो उनकी ईमानदारी को दर्शाती है। इस कार्रवाई से शहरवासी उत्साहित हैं, लेकिन कुछ व्यापारी संगठनों ने इसे ‘अत्यधिक सख्त’ बताते हुए आपत्ति जताई है।
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