
रायपुर Central Jail से बंदी फरार, प्रबंधन पर उठे सवाल
राजधानी की सेंट्रल जेल से एक बार फिर लापरवाही का मामला सामने आया है। हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों में शामिल बंदी करण पोर्ते को सामान्य बीमारी के उपचार के नाम पर एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया था।

वहीं से वह फरार हो गया। पुलिस ने उसे महाराष्ट्र की ओर जाते समय गोंदिया जा रही ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने जेल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों उठे सवाल?
आमतौर पर जेल में बंदियों का इलाज जेल अस्पताल में होता है। अगर वहां सुविधा न मिले तो आंबेडकर अस्पताल, डीकेएस या जिला अस्पताल में उपचार कराया जाता है। इस बार सीधे एम्स भेजा गया, जबकि आरोपी की गंभीर हालत कहीं से भी स्पष्ट नहीं दिखी। पकड़ में आने के बाद भी वह सामान्य दिखाई दे रहा था। ऐसे में एम्स में भर्ती कराने की आवश्यकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पहले भी हो चुके फरार
सेंट्रल जेल से पहले भी कई बंदियों के भागने के मामले सामने आ चुके हैं। सुरक्षा चूक और लापरवाही के कारण बार-बार ऐसी घटनाएँ होना जेल प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
फरारी और गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी करण पोर्ते को शनिवार को एम्स में भर्ती कराया गया था। कुछ देर बाद ही वह वहां से भाग निकला। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तलाश शुरू की लेकिन आरोपी का कुछ पता नहीं चल सका। बाद में जीआरपी दुर्ग को सूचना मिली कि आरोपी गोंदिया जा रही ट्रेन में है। वहीं से उसे हिरासत में लिया गया और रायपुर पुलिस को सौंप दिया गया। रायपुर Central Jail से बंदी फरार, प्रबंधन पर उठे सवाल

जेल में गांजा तस्करी का मामला भी
घटना के दूसरे दिन जेल परिसर से करीब 1 किलो गांजे का गोला बरामद हुआ। बताया जाता है कि इसे जेल में बंद अपराधियों के समर्थकों या साथी आरोपियों ने बाहर से फेंका था। यह मामला जेल की सुरक्षा व्यवस्था और कड़े निगरानी सिस्टम पर नए सिरे से सवाल खड़े करता है।
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