
Raipur आपने बनाया है तो संवारेंगे कब…नारे के साथ नर्सों ने निकाली रैली, मरीजों की सेवा प्रभावित
रायपुर: छत्तीसगढ़ के आंबेडकर अस्पताल में 24 दिनों से चली आ रही एनएचएम नर्सों की हड़ताल के कारण मरीजों की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। आंबेडकर अस्पताल सहित डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भी हड़ताल के चलते गंभीर दवाओं की आपूर्ति, इंजेक्शन देने और ब्लड सैंपल लेने का काम ठप पड़ा है। मरीजों को इलाज और जांच में परेशानी हो रही है, जबकि आवश्यक सेवाएं नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं की मदद से चलाने का प्रयास किया जा रहा है, पर अनुभवहीनता के कारण गुणवत्ता में अंतर दिख रहा है।

प्रबंधन का दावा और हड़ताल का प्रभाव
प्रबंधन का कहना है कि ब्लड जांच, सैंपलिंग और रेडियो डायग्नोस्टिक विभाग में काम जारी है, जिससे अस्पताल की सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं। लेकिन हकीकत में 526 स्थायी नर्स पदों में से सिर्फ 126 नर्सें ही सेवाएं दे रही हैं, बाकी संविदा और एनएचएम कर्मचारी हैं, जिनकी संख्या में कमी और 1252 होने वाली बेड कैपेसिटी को पूरा करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीण क्षेत्र के शहरी स्वास्थ्य केंद्र, पीएचसी और सीएचसी पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
प्रमुख मांगें और आंदोलन की लंबाई
नurses ने संविलियन, नियमितीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, वेतन वृद्धि, आरक्षण, अनुकंपा नियुक्ति, मेडिकल सुविधाएं, स्थानांतरण नीति और कैशलैस मेडिकल इंश्योरेंस जैसी कई मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। कर्मचारी पिछले 24 दिनों से यह हड़ताल जारी रखे हुए हैं और बुधवार को “आपने बनाया है तो संवारेंगे कब” के नारे लगाते हुए रैली निकाली और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी दिया।

मरीजों की बढ़ती मुश्किलें
हड़ताल के कारण लैब टेस्ट, शिशु वार्ड, पोषण पुनर्वास केंद्र बंद हो गए हैं। टीबी, मलेरिया, बीपी और शुगर जैसे मरीजों को दवाइयां समय पर नहीं मिल रही हैं। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वास्थ्य जांच भी रुकी हुई है। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों को लिखित आदेश के माध्यम से नहीं माना जाता, हड़ताल जारी रहेगी और अगर यह लंबी चली तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन पर होगी।
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