
पूर्व CM फारूक अब्दुल्ला भी AAP नेताओं से मिलने नहीं पाए, जम्मू कश्मीर में सियासी बवाल
जम्मू कश्मीर के राजनीतिक हालात एक बार फिर गर्मा गए हैं क्योंकि आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मेहराज मलिक को PSA (पब्लिक सेफ्टी एक्ट) के तहत गिरफ्तार किए जाने के विरोध में सियासी तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस मामले में विरोध जताने के लिए AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली के विधायक इमरान हुसैन श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए थे, लेकिन प्रशासन ने उनकी योजना को दबा दिया।

संजय सिंह और इमरान हुसैन जब सर्किट हाउस से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिस ने सर्किट हाउस के गेट बंद कर दिए और दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके बाद निर्धारित प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द हो गई। यह कार्रवाई क्षेत्रीय प्रशासन की कड़ी निगरानी और सख्ती की वजह से हुई।
हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। हिरासत में लिए जाने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, जो कि अब जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में राजनीति के एक बड़े शख्सियत हैं, संजय सिंह से मिलने सर्किट हाउस पहुंचे। लेकिन पुलिस ने फारूक अब्दुल्ला को भी संजय सिंह से मिलने की अनुमति नहीं दी। फारूक अब्दुल्ला ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि वह केवल मिलने गए थे, कोई राजनीतिक बयान देने नहीं। उन्होंने कहा कि सभी को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, बल्कि यह पूरा सच है कि संजय सिंह अपने गिरफ्तार विधायक के लिए समर्थन दिखाने दिल्ली से यहां आए थे।
पूर्व सीएम ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि लोगों के अधिकारों का सम्मान किया जाए और प्रशासन ऐसा करे कि राजनीतिक गतिविधियां सीमित और शांतिपूर्ण रहें। उन्होंने कहा कि शिकायत है कि जब मैं उनसे मिलने गया था, तो मुझे मिलने की अनुमति नहीं दी गई और यह बेहद दुख की बात है।
AAP ने इस मामले को लेकर भाजपा पर तीखी निशाना साधा है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, जो वर्तमान मुख्यमंत्री के पिता भी हैं, उन्हें भी उनके राज्य में किसी आप नेता से मिलने नहीं दिया जा रहा तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है। उन्होंने इसे तानाशाही और गुंडागर्दी बताया।

संजय सिंह ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि बहुत दुख की बात है कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री को पुलिस नजरबंद करने की खबर सुनकर मैं उनसे मिलने गया, मगर उन्हें मिलने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने इसे तानाशाही करार दिया और कहा कि लोकतंत्र के लिए यह चिंता का विषय है।
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